सातूं-आठूं (गमरा-महेश) लोकपर्व श्रद्धा,आस्था एवं उल्लास के साथ संपन्न,16 वर्षों से महादेव पांडेय परिवार जीवंत रखे हुए है लोकपर्व की परंपरा
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की, 23 अगस्त 2026। कुमाऊं की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक सातूं-आठूं (गमरा-महेश) लोकपर्व रविवार को शिवाजी कॉलोनी स्थित महादेव पांडेय के निवास पर श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। पिछले 16 वर्षों से लगातार आयोजित किए जा रहे इस पारंपरिक पर्व में परिवार के सदस्यों के साथ क्षेत्रवासियों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की। पूरे आयोजन के दौरान कुमाऊं की लोकपरंपराओं, रीति-रिवाजों और लोकगीतों की मनमोहक झलक देखने को मिली।
पर्व की शुरुआत पंचमी के दिन बिरुड़े भिगोने की पारंपरिक रस्म के साथ हुई। इसके बाद सातूं और आठूं के अवसर पर मां गमरा (गौरा) तथा महेश्वर (भगवान शिव) की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मां गमरा का पारंपरिक रूप से सुंदर श्रृंगार किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप मां गमरा को बेटी और महेश्वर को दामाद के रूप में मानते हुए विवाह की विभिन्न रस्में पूरी की गईं। इस दौरान महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने मंगल गीत और पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो गया।
रविवार शाम आयोजित मिलन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने मां गमरा और महेश्वर की पूजा-अर्चना कर परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धा और विधि-विधान के साथ गमरा-महेश की प्रतिमाओं का विसर्जन जोशी मंदिर, अशोक नगर में किया गया।
लोकसंस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है सातूं-आठूं
नगर पंचायत ढंडेरा के चेयरमैन सतीश नेगी ने कहा कि सातूं-आठूं केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह कुमाऊं की गौरवशाली लोकसंस्कृति, परंपरा, प्रकृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने महादेव पांडेय के परिवार को लगातार 16 वर्षों से इस लोकपरंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत बनाए रखने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
16 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा
महादेव पांडेय के परिवार की ओर से पिछले 16 वर्षों से सातूं-आठूं पर्व का आयोजन किया जा रहा है। परिवार के सभी सदस्य कई दिनों तक मां गमरा की सेवा, पूजा-अर्चना और विभिन्न पारंपरिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। परिवार का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक कुमाऊं की संस्कृति और लोक विरासत को पहुंचाना भी है।
क्षेत्रवासियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कार्यक्रम में महादेव पांडे, हरीश पांडे, रोशन पांडे, राजेंद्र सिंह रावत, कुंवर सिंह चौधरी, रमेश चंद्र जोशी, सभासद विजय सिंह पवार, बहादुर बोरा, राजेंद्र सिंह रावत चिन्हित उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, रमेश सौन, शिवाजी कॉलोनी अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह बिष्ट, तुलसी देवी, नंदा ऐरी, जानकी पांडे, दीपा त्रिपाठी, गोविंद जोशी, पार्वती रावत, शिव सिंह रावत, सत्येंद्र सिंह रावत, पंडित धर्मगुरु हरीश डिमरी, हुकम सिंह बिष्ट, ललित बड़थ्वाल, रामलाल काला, तिलक चंद्र पांडे सहित क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
समापन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने मां गमरा और महेश्वर से परिवार, समाज एवं क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि, प्रेम और भाईचारा बनाए रखने की प्रार्थना की। लोकपर्व के आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में भी पारंपरिक लोकसंस्कृति और सामाजिक मूल्यों को सामूहिक प्रयासों से जीवंत रखा जा सकता है।


