आईआईटी रुड़की ने इंडोबेल को सौंपी एरोजेल थर्मल रैप्स तकनीक, ‘मेक इन इंडिया’ को मिली मजबूती

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की, उत्तराखंड | 24 फरवरी, 2026। देश में उन्नत तकनीकों के स्वदेशी विकास और ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल को मजबूती देते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने एरोजेल-आधारित थर्मल रैप्स प्रौद्योगिकी का तकनीकी ज्ञान (नो-हाउ) इंडोबेल इंसुलेशन्स लिमिटेड को सफलतापूर्वक हस्तांतरित कर दिया है। यह कदम उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ उन्नत सामग्रियों के व्यावसायिक उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
आईआईटी रुड़की द्वारा विकसित यह एरोजेल थर्मल रैप्स तकनीक हल्के, उच्च-प्रदर्शन और ऊर्जा-कुशल इंसुलेशन समाधान प्रदान करती है। एरोजेल को दुनिया की सबसे हल्की ठोस सामग्रियों में गिना जाता है, जो अत्यधिक तापमान में भी उत्कृष्ट थर्मल इंसुलेशन क्षमता बनाए रखता है। इस तकनीक के माध्यम से तैयार किए गए थर्मल रैप्स कम वजन के होने के बावजूद उच्च तापरोधक क्षमता रखते हैं, जिससे ऊर्जा की बचत और परिचालन दक्षता में वृद्धि संभव है।
इस नवाचार का विकास आईआईटी रुड़की के प्रो. कौशिक पाल और सुश्री गुंजन शर्मा के नेतृत्व में किया गया है। शोधकर्ताओं की टीम ने इसे इस प्रकार डिजाइन किया है कि यह विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा कर सके। एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल, ऊर्जा उत्पादन प्रणालियों, पर्यावरणीय इंजीनियरिंग तथा निर्माण क्षेत्र में इस तकनीक के व्यापक उपयोग की संभावनाएं हैं। विशेष रूप से उन उद्योगों के लिए यह समाधान अत्यंत उपयोगी माना जा रहा है, जहां अत्यधिक तापमान नियंत्रण और हल्के वजन की आवश्यकता होती है।
इस अवसर पर प्रमुख आविष्कारक प्रो. कौशिक पाल ने कहा कि यह तकनीक व्यावहारिक और टिकाऊ इंसुलेशन समाधान विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक परिस्थितियों में भी विश्वसनीय प्रदर्शन इसकी प्रमुख विशेषता है। साथ ही इसकी बहुउपयोगिता इसे विविध औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह तकनीक देश में उच्च-प्रदर्शन इंसुलेशन सामग्री के निर्माण को नई गति देगी।
इंडोबेल इंसुलेशन्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री विजय बर्मन ने आईआईटी रुड़की के साथ हुए इस तकनीकी सहयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कंपनी इस प्रौद्योगिकी को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि संयुक्त प्रयासों से उन्नत और किफायती इंसुलेशन समाधान शीघ्र ही बाजार में उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे घरेलू उद्योगों को लाभ मिलेगा और आयात पर निर्भरता भी कम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के तकनीकी हस्तांतरण से न केवल अनुसंधान का व्यावसायिक उपयोग बढ़ेगा, बल्कि देश में नवाचार की संस्कृति भी सुदृढ़ होगी। आईआईटी रुड़की लगातार उद्योगों के साथ सहयोग कर शोध को वास्तविक उत्पादों में बदलने की दिशा में कार्य कर रहा है। एरोजेल थर्मल रैप्स प्रौद्योगिकी का यह हस्तांतरण संस्थान की उसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो सतत और ऊर्जा-कुशल समाधानों के विकास को प्राथमिकता देता है।
यह उपलब्धि भारत को उन्नत सामग्रियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






