इंसानियत की मिसाल: “लावारिसों की वारिस” शालू सैनी ने अज्ञात शव को दी सम्मानजनक अंतिम विदाई

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की।आज के दौर में जहां लोग अपने ही रिश्तों से किनारा कर लेते हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मानवता की मिसाल बनकर समाज को नई दिशा दे रहे हैं। मुजफ्फरनगर निवासी “लावारिसों की वारिस” के नाम से प्रसिद्ध क्रांतिकारी शालू सैनी ने एक बार फिर इंसानियत का फर्ज निभाते हुए एक अज्ञात शव का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर उसे विदाई दी।
मामला थाना ककरौली क्षेत्र का है, जहां पुलिस को एक अज्ञात शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी। काफी प्रयासों के बावजूद शव की पहचान नहीं हो सकी, जिसके चलते वह लावारिस की श्रेणी में आ गया। ऐसे में पुलिस ने शालू सैनी से संपर्क किया। सूचना मिलते ही शालू सैनी बिना देर किए मौके पर पहुंचीं और मृतक को अपना भाई मानते हुए अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।
शमशान घाट पर उस समय भावुक माहौल बन गया, जब शालू सैनी ने मृतक को भाई का दर्जा देते हुए पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया। वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। शालू सैनी ने कहा कि उनका एक ही उद्देश्य है—“कोई भी इंसान इस दुनिया से बेनाम और बेसहारा न जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि जब तक उनकी सांस चलेगी, वह इस सेवा कार्य को जारी रखेंगी।
गौरतलब है कि शालू सैनी पिछले कई वर्षों से समाज के इस अनदेखे और संवेदनशील कार्य को निरंतर कर रही हैं। वह हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समेत सभी धर्मों के लावारिस एवं बेसहारा शवों का उनके धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार करती हैं। अब तक वह करीब छह हजार से अधिक शवों का अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन अपने हाथों से कर चुकी हैं, जो अपने आप में एक अनोखी मिसाल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे कार्य समाज को जोड़ने और इंसानियत को जीवित रखने का संदेश देते हैं। वहीं पुलिस प्रशासन ने भी शालू सैनी के इस संवेदनशील और सराहनीय कार्य की प्रशंसा की है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे लोग समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं।
आज के समय में जब रिश्ते अक्सर स्वार्थ के आधार पर देखे जाते हैं, शालू सैनी का यह प्रयास यह साबित करता है कि मानवता अभी भी जीवित है। उनका यह कार्य न केवल समाज को प्रेरित करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।
शालू सैनी ने आम जनता से भी अपील की है कि इस सेवा कार्य में सहयोग करें, ताकि कोई भी मृतक सम्मानजनक अंतिम संस्कार से वंचित न रह जाए। उनके इस जज्बे और समर्पण ने उन्हें समाज में एक विशेष पहचान दिलाई है और वह आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

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