रुड़की में नन्हे अली अहमद काजमी ने रखा पहला रोजा,हिंदू-मुस्लिम साथियों संग मनाई खुशी

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। पवित्र माह रमजान के पहले अशरा, जिसे रहमतों का पखवाड़ा कहा जाता है, के दौरान शहर में इबादत और भाईचारे का अनूठा दृश्य देखने को मिला। मंगलौर के मोहल्ला किला निवासी शमीम काजमी के सात वर्षीय नवासे अली अहमद काजमी ने अपना पहला रोजा रखा। इस खास मौके को और भी यादगार बना दिया उनके स्कूल के साथियों ने, जिन्होंने धर्म से ऊपर उठकर दोस्ती और एकता का परिचय दिया।
रमजान के पहले अशरे में रोजेदार तरावीह और विशेष नमाज में व्यस्त रहते हैं। इसी पावन समय में छोटे-छोटे बच्चों में भी धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। अली अहमद काजमी ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ अपना पहला रोजा रखा। परिवार में इस अवसर पर खुशी का माहौल रहा। घर पर इफ्तार के दौरान विशेष इंतजाम किए गए और बच्चे के इस कदम की सराहना की गई।
इस मौके की सबसे खास बात यह रही कि अली अहमद काजमी के साथ पढ़ने वाले उसके मुस्लिम सहपाठी तो शामिल हुए ही, साथ ही कुछ हिंदू नन्हे मित्र भी उसकी इस खुशी में शरीक हुए। सभी बच्चों ने मिलकर इफ्तार के समय का आनंद लिया और एक-दूसरे को बधाई दी। बच्चों की यह मासूम एकता और स्नेह समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आई।
अली के मित्रों ने बताया कि वह हर पर्व—चाहे वह ईद हो, दीवाली या होली—सभी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है और सबके साथ मिलकर खुशियां बांटता है। इसी कारण वे भी उसके पहले रोजे की खुशी में शामिल होना चाहते थे। बच्चों की यह भावना दर्शाती है कि सच्ची दोस्ती और आपसी सम्मान किसी भी धर्म या परंपरा से बड़ा होता है।
अली अहमद काजमी के पिता फुजैल काजमी और माता एडवोकेट मारिया काजमी ने कहा कि बच्चों में धार्मिक संस्कार बचपन से ही विकसित किए जाने चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म के हों। उनका मानना है कि इससे बच्चों में न केवल अपने धर्म के प्रति आस्था पैदा होती है, बल्कि वे दूसरों के धर्म और संस्कृति का भी सम्मान करना सीखते हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चों को सही दिशा और संस्कार मिलते हैं तो उनमें राष्ट्रीयता और मानवता का भाव स्वतः विकसित होता है।
उन्होंने आगे कहा कि नन्हें बालक फरिश्तों के समान होते हैं, जिनके मन में कोई भेदभाव नहीं होता। यदि उन्हें प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का वातावरण दिया जाए तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
इस अवसर पर काजी जमाल काजमी, अताए साबिर, अनिल शर्मा, नज्म काजमी, उमर, अहम हुसैन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे और अली को उसके पहले रोजे की मुबारकबाद दी। सभी ने बच्चों की इस एकता को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
रुड़की में यह दृश्य केवल एक बच्चे के पहले रोजे का नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का प्रतीक बन गया, जिसने यह संदेश दिया कि प्रेम और सम्मान ही सच्ची इबादत है।






