February 23, 2026

आईआईटी रुड़की में चौथे रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026 का भव्य उद्घाटन,सीमापार जल सहयोग और नेक्सस-आधारित जल शासन पर वैश्विक मंथन

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की, उत्तराखंड | 23 फरवरी 2026। Indian Institute of Technology Roorkee (आईआईटी रुड़की) ने National Institute of Hydrology (एनआईएच) रुड़की के सहयोग से 23–25 फरवरी 2026 तक आयोजित 4वें रुड़की वाटर कॉन्क्लेव (आरडब्ल्यूसी 2026) का औपचारिक उद्घाटन किया। इस वर्ष कॉन्क्लेव की थीम “नेक्सस दृष्टिकोण के माध्यम से सीमापार जल सहयोग” रखी गई है, जिसका उद्देश्य जल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के अंतर्संबंधों को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ और समावेशी जल शासन मॉडल विकसित करना है।
यह द्विवार्षिक आयोजन वैश्विक नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और जल प्रबंधन से जुड़े पेशेवरों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहां वे सीमापार नदी बेसिन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, हाइड्रो-मौसमीय चरम घटनाओं, भूजल स्थिरता और जल गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने की, जबकि एनआईएच के निदेशक डॉ. वाई.आर.एस. राव सह-अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। कॉन्क्लेव के संयोजक प्रो. आशीष पांडे ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और संस्थान के कुलगीत से हुई।
अपने संबोधन में प्रो. पंत ने कहा कि जल सुरक्षा का सीधा संबंध जलवायु सहनशीलता, खाद्य प्रणालियों और ऊर्जा स्थिरता से है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एआई आधारित डेटा सेंटरों की बढ़ती संख्या के कारण जल की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और वैज्ञानिक जल शासन की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और वैश्विक साझेदारियों को प्रोत्साहित करते हैं।
कार्यक्रम में International Water Management Institute (आईडब्ल्यूएमआई) के महानिदेशक डॉ. मार्क स्मिथ, नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद के. पॉल सहित कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। साथ ही पद्मश्री सम्मानित श्री सवजीभाई धोलकिया, श्री पोपटराव पवार और श्री उमाशंकर पांडे ने जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी की महत्ता पर विशेष बल दिया।
कॉन्क्लेव में संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, इज़राइल, नीदरलैंड, कनाडा, जापान, नॉर्वे, श्रीलंका, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ताइवान और नेपाल सहित विभिन्न देशों से 42 प्रमुख वक्ता भाग ले रहे हैं। ये विशेषज्ञ तकनीकी सत्रों और पैनल चर्चाओं के माध्यम से जलवायु परिवर्तन और जल सुरक्षा से जुड़ी समकालीन चुनौतियों तथा नवाचारी समाधानों पर चर्चा करेंगे।
आरडब्ल्यूसी 2026 की एक विशेष आकर्षण ‘जल सहयोग में सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक-आर्थिक पहलू’ विषय पर आयोजित उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा है, जिसमें विज्ञान, नीति और जमीनी नेतृत्व के समन्वय पर जोर दिया जाएगा। इस पैनल का उद्देश्य समावेशी और संस्थागत रूप से सुदृढ़ जल शासन ढांचे विकसित करना है।
आईआईटी रुड़की, देश का सबसे प्राचीन तकनीकी संस्थान, जल संसाधन प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में अनुसंधान और नीति सहभागिता को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। 4वां रुड़की वाटर कॉन्क्लेव 2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो सीमापार जल सहयोग को सुदृढ़ करने और सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगा।

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