आईआईटी रुड़की में ‘संचय’ राष्ट्रीय शिल्प संसाधन केंद्र की स्थापना, भारतीय शिल्प विरासत को मिलेगा नया आयाम

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के तहत ‘संचय’ – एक शिल्प आधारित संसाधन केंद्र (Craft Based Resource Centre – CBRC) की स्थापना की घोषणा की है। यह केंद्र आईआईटी रुड़की के ऐतिहासिक परिसर में स्थापित किया जाएगा और देश की समृद्ध शिल्प परंपराओं को डिज़ाइन, प्रौद्योगिकी और नवाचार के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस परियोजना को वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय का पूर्ण सहयोग प्राप्त है।
‘संचय’ (Safeguarding, Accumulating, Nurturing Craft and Heritage to stimulate Aatmanirbharta and Yogyata) को एक राष्ट्रीय स्तर के ऐसे केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जो भारत की विविध शिल्प विरासत के संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास के लिए समर्पित होगा। प्रारंभिक चरण में इसका विशेष फोकस हिमालयी राज्य उत्तराखंड पर रहेगा, जहां की कई पारंपरिक शिल्प विधाएं आज संकट के दौर से गुजर रही हैं। यह केंद्र इन शिल्पों के पुनरुद्धार, दस्तावेजीकरण और शिल्पकार समुदायों के सशक्तिकरण के लिए संरचित प्रशिक्षण, डिज़ाइन विकास, डिजिटल प्रलेखन और आधुनिक तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
इस महत्वाकांक्षी पहल का नेतृत्व आईआईटी रुड़की के डिज़ाइन विभाग द्वारा किया जा रहा है। विभागाध्यक्ष प्रो. अपूर्बा कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में प्रो. स्मृति सरस्वत (समन्वयक), प्रो. इंदरदीप सिंह, प्रो. उषा लेंका और प्रो. विभूति भट्टाचार्य (सह-समन्वयक) इस परियोजना से जुड़े हैं। इनके साथ शोधार्थी सैयद इफराह असफर और आदित्य जैन भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।
सीबीआरसी के अंतर्गत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी-सक्षम कार्यस्थल, डिज़ाइन एवं प्रदर्शनी स्टूडियो, मेकर लैब्स और डिजिटल अभिलेखागार की स्थापना की जाएगी। केंद्र एक व्यापक शिल्प विश्वकोश और शिल्पकार निर्देशिका विकसित करेगा, जिन्हें ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे शिल्प और औपचारिक शिक्षा के बीच सेतु का निर्माण हो सके।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा कि ‘संचय’ भारत की शिल्प विरासत को आधुनिक विज्ञान, डिज़ाइन और प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं, वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) ने इसे शिल्प संरक्षण और नवाचार के लिए एक दूरदर्शी मॉडल बताया, जो शिल्पकारों की आजीविका, वैश्विक दृश्यता और स्थिरता को बढ़ावा देगा।
कुल मिलाकर, ‘संचय’ विरासत, नवाचार और सतत विकास के संगम पर आईआईटी रुड़की को एक लाइटहाउस संस्थान के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ वैश्विक रचनात्मक संवाद में भी प्रभावी भूमिका निभाएगा।

