January 27, 2026

समृद्धि के लिए एकीकृत खेती: आईआईटी रुड़की के नेतृत्व में पर्वतीय गाँवों में सतत विकास की नई राह

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सतत ग्रामीण विकास, आजीविका सृजन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय की परिकल्पना पर आधारित रूटैज स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) को आईआईटी रुड़की द्वारा अल्मोड़ा जनपद के खुंट गाँव में ज़मीनी स्तर पर सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया जा रहा है। यह पहल शिक्षा, एकीकृत खेती, आजीविका, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़ते हुए “विजन 2047” के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में अग्रसर है।
आईआईटी रुड़की, सेतु आयोग, नेहिर हिमालयन फ़ाउंडेशन और आरटी फ़ाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों, रेशम विभाग के सहयोग और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से आरएसवीसी के तहत योजनाएँ कागज़ों से निकलकर गाँव के दैनिक जीवन का हिस्सा बन रही हैं। इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में एकीकृत खेती को बढ़ावा देते हुए एक लाख से अधिक शहतूत पौधों का रोपण शामिल है, जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से क्षेत्र की महिलाओं ने किया। यह पहल न केवल हरित आवरण बढ़ा रही है, बल्कि समुदाय-प्रेरित विकास का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है।
शहतूत रोपण से रेशम उत्पादन, मूल्य-वर्धित उत्पादों और स्थानीय उद्यमिता के नए अवसर खुल रहे हैं। इसके साथ ही किसान एकीकृत खेती मॉडल अपनाते हुए शहतूत के साथ हल्दी और अदरक जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं। इससे आय के विविध स्रोत विकसित हो रहे हैं और भूमि संरक्षण के साथ मृदा अपरदन को भी रोका जा रहा है। शहतूत चाय जैसे नवाचार स्थानीय उत्पादों को नए बाज़ारों से जोड़ने की संभावनाएँ पैदा कर रहे हैं।
आरएसवीसी के अंतर्गत स्थापित उन्नत बागेश्वरी ऊन चरखा भी ग्रामीण आजीविका में अहम भूमिका निभा रहा है। इस चरखे को स्थानीय कारीगरों की आवश्यकताओं के अनुरूप पुनः डिज़ाइन किया गया है, जिसे पैरों और विद्युत—दोनों माध्यमों से चलाया जा सकता है। सौर समर्थन, बैटरी बैक-अप और समायोज्य गति जैसी विशेषताओं ने महिलाओं और हथकरघा कर्मियों की उत्पादकता बढ़ाई है तथा श्रम और समय की बचत की है।
इस पहल का सबसे सशक्त पक्ष महिला सशक्तिकरण है। जो महिलाएँ पहले घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वे अब रोपण, योजना निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। छोटी बालिकाओं से लेकर बुज़ुर्ग महिलाओं तक की भागीदारी ने इसे एक समावेशी आंदोलन का रूप दे दिया है। साथ ही, निःशुल्क सामुदायिक पुस्तकालय और अध्ययन केंद्रों ने गाँव में शिक्षा का माहौल मजबूत किया है।
17 जनवरी 2026 को खुंट गाँव में आयोजित “हरित खुलगाड़ नारी शक्ति उत्सव 2026” में इन उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सेतु आयोग के उपाध्यक्ष श्री राज शेखर जोशी और आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने कहा कि शिक्षा और प्रौद्योगिकी का समन्वय पर्वतीय क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और पलायन रोकने की कुंजी है।
कुल मिलाकर, आरएसवीसी के तहत एकीकृत खेती और सामुदायिक नवाचार उत्तराखंड के पर्वतीय गाँवों में सतत विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन की एक सशक्त मिसाल बनकर उभर रहे हैं।

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