January 27, 2026

हरिद्वार में वनाग्नि रोकथाम को लेकर प्रशासन सतर्क, डीएम मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में सुरक्षा समिति की बैठक

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

 हरिद्वार – जिले में वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय में जिला वनाग्नि सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में चंडी देवी एवं मनसा देवी मंदिर क्षेत्र को विशेष रूप से संवेदनशील मानते हुए वनाग्नि से निपटने की तैयारियों की गहन समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों मंदिर क्षेत्रों में वनाग्नि की संभावित घटनाओं पर निरंतर और सघन निगरानी रखी जाए। उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी को आदेशित किया कि मंदिर समितियों को फायर सेफ्टी संबंधी प्रशिक्षण दिया जाए तथा फायर जैकेट, अग्निशामक यंत्र और अन्य आवश्यक उपकरणों की सूची उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते आग पर नियंत्रण पाया जा सके।
डीएम ने अग्निशमन विभाग को भी स्पष्ट निर्देश दिए कि चंडी देवी और मनसा देवी मंदिरों तक जाने वाले यातायात मार्गों पर फायर ब्रिगेड वाहनों एवं एम्बुलेंस के साथ मॉक ड्रिल आयोजित की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपदा या आपातकालीन स्थिति में राहत एवं बचाव दल को मंदिर क्षेत्र तक पहुंचने में कोई बाधा न हो। साथ ही उन्होंने जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को निर्देश दिए कि आपदा मित्रों को प्रशिक्षित किया जाए और उन्हें वनाग्नि नियंत्रण से संबंधित आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
बैठक में यह भी बताया गया कि हरिद्वार जनपद में वनाग्नि की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए वन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी स्वप्निल अनिरुद्ध ने जानकारी दी कि वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील सभी क्षेत्रों में लगातार फायर ड्रिल की जा रही है। इसके अंतर्गत सड़कों के किनारे गिरे सूखे पत्तों को हटाया जा रहा है और फुकान कर साफ किया जा रहा है, जिससे आग लगने की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।
उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई केवल मुख्य मार्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि वन क्षेत्रों के भीतर भी विभाग की टीमें सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इसके अलावा वन विभाग द्वारा जागरूकता अभियानों के माध्यम से ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों को सतर्क किया जा रहा है, ताकि वे समय रहते वनाग्नि की घटनाओं को पहचान कर विभाग को सूचित कर सकें।
वनाधिकारी ने कहा कि विभागीय टीमें जंगलों में आग पर नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक उपकरणों और संसाधनों से सुसज्जित हैं। वन विभाग का लक्ष्य इस वर्ष वनाग्नि की घटनाओं को शून्य के स्तर तक सीमित करना है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की आगजनी गतिविधियों से बचें और आग लगने की स्थिति में तत्काल वन विभाग या प्रशासन को सूचित करें, ताकि वनों की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा की रक्षा की जा सके।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, उप जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी आशुतोष भंडारी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी नेहा झा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत सहित अग्निशमन विभाग एवं राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे।

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