गर्भवती महिला की प्रेस वार्ता: दहेज उत्पीड़न और गर्भपात की कोशिश के गंभीर आरोप, इंसाफ के लिए भटक रही पीड़िता

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं दून एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गर्भवती महिला ने अपने ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, बेरहमी से मारपीट और जबरन गर्भपात कराने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता की।
पीड़ित महिला साक्षी सैनी अपने परिजनों के साथ प्रेस क्लब पहुंची और मीडिया के सामने अपनी आपबीती साझा की। साक्षी का कहना है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले उस पर दहेज लाने का दबाव बना रहे थे। दहेज की मांग पूरी न होने पर उसके साथ लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया। आरोप है कि हाल ही में जब वह गर्भवती थी, तब ससुरालियों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को नष्ट करने की नीयत से गर्भपात कराने की भी कोशिश की।
पीड़िता के अनुसार, समय रहते उसके मायके पक्ष के लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे उसकी जान और गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाया जा सका। हालांकि, इसी दौरान ससुराल पक्ष ने उसके मायके वालों के साथ भी मारपीट की और उन्हें जान से मारने की धमकियां दीं। साक्षी ने बताया कि इस पूरे मामले की शिकायत स्थानीय थाने से लेकर उच्च पुलिस अधिकारियों तक की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने केवल औपचारिकता निभाते हुए उसका मेडिकल परीक्षण तो करा दिया, लेकिन आज तक न तो मुकदमा दर्ज किया गया और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया गया। साक्षी का कहना है कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस कार्रवाई से बच रही है, जिसके कारण उसे और उसके परिवार को इंसाफ नहीं मिल पा रहा है।
प्रेस वार्ता में पीड़िता के भाई जेनीश सैनी ने भी प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि उनकी बहन की जान को खतरा बना हुआ है और पूरा परिवार भय के साए में जीने को मजबूर है।
पत्रकार वार्ता के दौरान पीड़िता ने प्रशासन और पुलिस से मांग की कि दहेज के लालची, महिला उत्पीड़न करने वाले और गर्भ हत्या की कोशिश करने वालों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही उसने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की स्थिति को भी उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में कब तक कार्रवाई करता है और पीड़िता को कब न्याय मिल पाता है।






