आईआईटी रुड़की के पैरा एथलीट सौरव कुमार ने संघर्ष को बनाया ताक़त, पीढ़ियों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

(ब्योरो – दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की, उत्तराखंड, 08 जनवरी 2025। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) के युवा पैरा एथलीट सौरव कुमार ने अपने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प से यह साबित किया है कि चुनौतियाँ कभी भी सफलता के मार्ग की बाधा नहीं बनतीं, बल्कि उन्हें अवसर में बदला जा सकता है। अभियांत्रिकी भौतिकी में हाल ही में बी.टेक. की डिग्री प्राप्त करने वाले सौरव बचपन से ही निचले अंग की दिव्यांगता के साथ जीवन जी रहे हैं, फिर भी उन्होंने अपने हौसले के बल पर न केवल खेल जगत में, बल्कि नवाचार और नेतृत्व के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
सौरव का पैरा खेलों से जुड़ाव वर्ष 2024 में शुरू हुआ। उसी वर्ष उन्होंने आईआईटी रुड़की परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के माध्यम से पैरा ओलंपियन मोहम्मद शम्स आलम और प्रमोद भगत जैसे नामी खिलाड़ियों को आमंत्रित किया। इन खिलाड़ियों की प्रेरक कहानियों ने सौरव के भीतर कुछ नया करने का जज़्बा जगाया। इसी दौरान कैंसर के कारण अपनी माँ को खोने का गहरा दुख सहते हुए सौरव ने तैराकी को अपनाने का निर्णय लिया। प्रशिक्षकों और प्रशासन की प्रारंभिक झिझक के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने संकल्प के दम पर पूल में उतरकर अपनी नई यात्रा शुरू की।
प्रतिस्पर्धी तैराकी की दुनिया में प्रवेश के मात्र तीन महीनों में सौरव ने राज्य स्तर पर दो रजत पदक जीते और 2024 की राष्ट्रीय पैरा तैराकी चैम्पियनशिप में शीर्ष दस में स्थान हासिल किया। अपनी सफलता की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सितंबर 2025 में आयोजित राज्य और ज़िला प्रतियोगिताओं में चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए। 15 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में 100 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में 17 प्रतिभागियों के बीच चौथा स्थान प्राप्त कर उन्होंने अपनी राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया। वर्तमान में सौरव एक ही सत्र में 5 किलोमीटर तक तैर सकते हैं और एशियाई खेलों तथा खेलो इंडिया में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें मार्च 2026 में इटली में होने वाली विश्व पैरा तैराकी चैम्पियनशिप श्रृंखला के लिए भी चयनित किया गया है, जिसके लिए आईआईटी रुड़की ने पूर्ण प्रायोजन की जिम्मेदारी उठाई है।
खेल के साथ-साथ सौरव शैक्षणिक और नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी हैं। वे 2025 में संस्थान के स्नूकर चैम्पियन रहे, आईआईटी रुड़की के टाइड्स केंद्र में संवर्धित गहन-प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप ‘आईरिस इको-टेक’ के सह-संस्थापक हैं, और कृत्रिम पैर प्रौद्योगिकी पर भी शोध कर रहे हैं। उनके योगदान के लिए उन्हें व्यावसायिक विकास एवं नवाचार पुरस्कार 2025 तथा हरि कृष्ण मित्तल नेतृत्व पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर कमल किशोर पंत ने सौरव की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सौरव की कहानी साहस, धैर्य और इच्छाशक्ति का प्रतीक है और संस्थान समावेशी वातावरण निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी अपनी क्षमताओं का पूरा विकास कर सके। वहीं सौरव का कहना है कि सपनों को पूरा करने के लिए परिपूर्ण शरीर नहीं, बल्कि विश्वास और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता होती है।
आईआईटी रुड़की में 150 से अधिक दिव्यांग विद्यार्थियों के साथ संस्थान समावेशन की दिशा में निरंतर कार्यरत है। विद्यार्थी कल्याण अधिष्ठाता कार्यालय ने सौरव की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए प्रशिक्षण सुविधाएँ, यात्रा सहायता और प्रतियोगिताओं के लिए संस्थागत प्रायोजन उपलब्ध कराया। सौरव की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह संदेश देती है कि सीमाएँ वही होती हैं, जिन्हें हम स्वीकार करते हैं।

