आईआईटी रुड़की में ‘एमएसएमई इनोवेटिव (डिज़ाइन) योजना’ पर जागरूकता सत्र आयोजित

(ब्योरो रिपोर्ट/ दिलशाद खान।KNEWS18)
आईआईटी रुड़की के डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर द्वारा ‘एमएसएमई इनोवेटिव (डिज़ाइन) योजना’ पर उद्योग–अकादमिक इंटरफ़ेस विषयक एक महत्वपूर्ण जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 30 दिसंबर 2025 को हिमाचल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (HCCI), पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन आईआईटी रुड़की के डिज़ाइन विभाग, डेवलपमेंट एंड फ़ैसिलिटेशन ऑफिस (DFO-MSME), सोलन तथा जिला उद्योग केंद्र, नाहन (सिरमौर) के सहयोग से किया गया।
इस जागरूकता सत्र का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को डिज़ाइन-आधारित नवाचार की दिशा में प्रेरित करना था, ताकि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, डिज़ाइन विशेषज्ञता और रचनात्मक समाधानों के माध्यम से नई दिशा मिल सके। ‘एमएसएमई इनोवेटिव (डिज़ाइन) योजना’ के अंतर्गत उद्योगों को अनुभवी डिज़ाइनरों का मार्गदर्शन, वास्तविक समय की समस्याओं के लिए किफ़ायती समाधान तथा नए व मौजूदा उत्पादों में मूल्य संवर्धन हेतु परामर्श प्रदान किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को इस योजना के विभिन्न घटकों, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और संभावित लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का समन्वय प्रो. इंदरदीप सिंह, डीन इंफ्रास्ट्रक्चर एवं समन्वयक, डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर, आईआईटी रुड़की ने किया। उन्होंने उपस्थित एमएसएमई प्रतिनिधियों और सरकारी संस्थाओं के अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिज़ाइन आज प्रतिस्पर्धी बाजार में किसी भी उत्पाद की सफलता का महत्वपूर्ण तत्व है। बेहतर डिज़ाइन न केवल उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाता है, बल्कि लागत में कमी, उपयोगिता में वृद्धि और ब्रांड मूल्य सृजन में भी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने योजना के विभिन्न चरणों—समस्या पहचान, डिज़ाइन हस्तक्षेप, प्रोटोटाइप विकास और व्यावसायीकरण—के बारे में भी जानकारी दी।
इस अवसर पर प्रो. अपूर्बा कुमार शर्मा, विभागाध्यक्ष, डिज़ाइन विभाग, आईआईटी रुड़की; श्री ए. के. गौतम (IEDS), सहायक निदेशक एवं कार्यालय प्रमुख, DFO-MSME, सोलन; श्री पार्थ अशोक (E.I), सहायक निदेशक, DFO-MSME, सोलन; तथा राहुल बंसल, सहायक निदेशक, DFO-MSME, सोलन सहित जिला उद्योग केंद्र, नाहन (सिरमौर) के अधिकारी भी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में बताया कि डिज़ाइन-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर एमएसएमई वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न उद्योग क्षेत्रों से आए उद्यमियों और प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने डिज़ाइन हस्तक्षेप, वित्तीय सहायता, सहयोगी संस्थाओं की भूमिका तथा उद्योग–अकादमिक साझेदारी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। उन्होंने इस प्रकार के सत्रों को अत्यंत उपयोगी बताया और कहा कि ऐसी पहलें एमएसएमई क्षेत्र में नवाचार संस्कृति को बढ़ावा देती हैं।
जागरूकता सत्र के अंत में यह निष्कर्ष सामने आया कि ‘एमएसएमई इनोवेटिव (डिज़ाइन) योजना’ उद्योगों को न केवल तकनीकी व डिज़ाइन संबंधी सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें बदलते बाजार परिदृश्य में टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनने की दिशा भी दिखाती है। आईआईटी रुड़की और साझेदार संस्थानों द्वारा उठाया गया यह कदम उद्योग–अकादमिक सहयोग को नई ऊर्जा प्रदान करेगा और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

