भारत–जर्मनी सहयोग को नई गति: उत्तराखंड–ब्रांडेनबुर्ग संयुक्त आशय घोषणा पर हस्ताक्षर, IIT रुड़की ने निभाई प्रमुख भूमिका

(ब्योरो – दिलशाद खान।KNEWS18)
(रुड़की, उत्तराखंड) / विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत और जर्मनी के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तराखंड राज्य सरकार और जर्मनी के ब्रांडेनबुर्ग राज्य सरकार के बीच संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent – JDI) पर हस्ताक्षर किए गए। इस ऐतिहासिक पहल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT रुड़की) ने प्रमुख पहलकर्ता, सुगमकर्ता और शैक्षणिक साझेदार के रूप में केंद्रीय भूमिका निभाई।
संयुक्त आशय घोषणा संरचित अंतर-सरकारी सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत करती है, जिसके माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, उच्च शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग और कौशल विकास को सुदृढ़ करने की प्राथमिकताओं के अनुरूप है और उत्तराखंड सरकार के वैश्विक सहभागिता के सक्रिय दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है।
इस समझौते के तहत IIT रुड़की और जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम मिलकर संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान, नीति संवाद और नवाचार-आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंगे। इसके साथ ही एक संयुक्त कार्य बल (Joint Task Force) का गठन किया जाएगा, जिसमें दोनों सरकारों तथा साझेदार संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह कार्य बल प्राथमिक पहलों की पहचान करेगा, सहयोग का रोडमैप तैयार करेगा और व्यापक सहयोग हेतु औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) का प्रस्ताव रखेगा।
संयुक्त आशय घोषणा के अंतर्गत बहुआयामी सहयोग की परिकल्पना की गई है। इसके तहत संयुक्त सूचना एवं कौशल केंद्र की स्थापना, भारत–जर्मनी स्टार्ट-अप्स के लिए उद्योग संपर्क कार्यालय की स्थापना, संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों का विकास, प्राथमिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन जैसी महत्वपूर्ण पहलें शामिल हैं। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में आपदा लचीलापन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां, स्वच्छ ऊर्जा और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था, डिजिटल प्रौद्योगिकी और डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, उन्नत विनिर्माण, नवीन सामग्री तथा कृषि एवं पर्यावरण निगरानी के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी शामिल हैं।
कार्यक्रम में दोनों पक्षों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत के नेतृत्व में संस्थान के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। जर्मनी की ओर से ब्रांडेनबुर्ग संघीय राज्य की विज्ञान, अनुसंधान एवं सांस्कृतिक मामलों की मंत्री डॉ. मान्या शुले और यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम के अध्यक्ष प्रो. ओलिवर ग्यूंथर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उत्तराखंड सरकार की ओर से तकनीकी शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा और तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. त्रिप्ता ठाकुर शामिल रहीं।
डॉ. मान्या शुले ने कहा कि यह आशय घोषणा उच्च शिक्षा और अनुसंधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देगी और दोनों क्षेत्रों के बीच स्थायी साझेदारी को मजबूत करेगी। वहीं, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने इसे उत्तराखंड के लिए कौशल विकास, स्टार्ट-अप संवर्धन और संयुक्त अनुसंधान के नए अवसरों का द्वार बताया। IIT रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत ने आशा व्यक्त की कि यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न के अनुरूप नवाचार-आधारित सतत विकास को गति देगी।
IIT रुड़की और यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम ने इस घोषणा के क्रियान्वयन में सक्रिय रूप से शैक्षणिक और समन्वयक साझेदार के रूप में योगदान देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। इस संयुक्त पहल से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में भारत–जर्मनी सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत होने की उम्मीद है।

