एक बार फिर मानवता हुई शर्मसार, कूड़े के ढेर में फेंकी गई मासूम बच्ची को मिली ससम्मान अंतिम विदाई

(ब्योरो – दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। समाज की संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक हृदयविदारक घटना तितावी थाना क्षेत्र से सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जिस देश में बेटियों को देवी का रूप मानकर पूजा जाता है, उसी समाज में एक निर्दयी व्यक्ति ने अपनी एक दिन की दुधमुंही बच्ची को कूड़े के ढेर में मरने के लिए छोड़ दिया। यह दृश्य इतना दर्दनाक था कि जिसने भी इसके बारे में सुना, उसकी आंखें भर आईं और मन भीतर तक कांप उठा।प्राप्त जानकारी के अनुसार तितावी पुलिस को सूचना मिली कि कूड़े के ढेर में एक नवजात बच्ची का शव पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि आवारा कुत्ते मासूम के शव को नोच रहे थे। वह नन्ही जान, जिसने अभी दुनिया की हवा भी ठीक से महसूस नहीं की थी, अपनों की बेरुखी और क्रूरता का शिकार बन गई। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज की गिरती संवेदनाओं को भी उजागर करती है।
घटना की जानकारी मिलते ही साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता क्रांतिकारी शालू सैनी तुरंत मौके पर पहुंचीं। जब उस मासूम का कोई अपना नहीं था, तब शालू सैनी ने आगे बढ़कर एक अभिभावक का धर्म निभाया। उन्होंने नम आंखों से बच्ची के क्षत-विक्षत शव को अपने हाथों से संभाला और पूरी विधि-विधान के साथ ससम्मान उसका अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें नम थीं और माहौल गमगीन बना रहा।
अंतिम संस्कार के बाद भावुक होते हुए क्रांतिकारी शालू सैनी ने कहा कि आज शब्द कम पड़ रहे हैं। उस मासूम का आखिर कसूर क्या था? अगर बच्ची इस दुनिया में नहीं चाहिए थी, तो उसे किसी अस्पताल, सरकारी संस्था या अनाथालय के पालने में छोड़ दिया जाता। उसे कूड़े के ढेर में कुत्तों के सामने फेंक देना इंसानियत की सबसे बड़ी हार है। उन्होंने कहा कि आज केवल एक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया, बल्कि समाज की मर चुकी संवेदनाओं को भी अग्नि दी गई है।
शालू सैनी ने समाज के हर नागरिक से अपील की कि बेटियों को बोझ न समझें और न ही उनसे मुंह मोड़ें। यदि किसी कारणवश बच्ची को पालना संभव न हो, तो सामाजिक संस्थाओं, सरकारी हेल्पलाइन

