वेतन कटौती से लेकर टेंडर घोटाले तक आरोपों की बौछार, उपप्रधान ने खोली पंचायत की पोल

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम लाठरदेवा शेख में पंचायत कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। ग्राम उपप्रधान एजाज अहमद ने प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस खुलासे के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उपप्रधान एजाज अहमद ने कहा कि ग्राम पंचायत में सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे आम जनता में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। एजाज अहमद के अनुसार जब भी वह इन मुद्दों को उठाने की कोशिश करते हैं, तो पंचायत की बैठकें या तो आयोजित ही नहीं की जातीं, और यदि बैठक होती भी है तो उसमें विवाद और झगड़े की स्थिति पैदा हो जाती है।
उपप्रधान ने साप्ताहिक पीठ (बाजार) के वार्षिक टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों से टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और टेंडर लगातार एक ही परिचित व्यक्ति को दिया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 का टेंडर अप्रैल में न होकर तीन महीने की देरी से जून में किया गया, जबकि 2026-27 के लिए टेंडर प्रक्रिया को अप्रैल में ही पूरा कर लिया गया। इतना ही नहीं, टेंडर लेने वाले व्यक्ति को मात्र 10 दिनों के भीतर 50 प्रतिशत राशि जमा करने के निर्देश भी दिए गए, जो नियमों पर सवाल खड़े करता है।
एजाज अहमद ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में ग्राम प्रधान और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत है। उन्होंने खुली बैठकों में अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पंचायत स्तर पर जवाबदेही समाप्त हो रही है और मनमानी को बढ़ावा मिल रहा है।
इस दौरान सफाई कर्मचारी सोमपाल ने भी अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका मासिक वेतन 12,000 रुपये तय किया गया था, लेकिन उन्हें हर महीने केवल 10,000 रुपये ही दिए जा रहे हैं। सोमपाल ने बताया कि उन्होंने कई बार अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया, इसके बावजूद उन्हें वेतन नकद दिया जा रहा है, जो सरकारी नियमों के खिलाफ है। उन्होंने वेतन में कटौती और अनियमित भुगतान को लेकर भी जांच की मांग की।
इन सभी आरोपों के सामने आने के बाद ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं।






