डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल तेज, आवश्यक सेवाएं प्रभावित अर्धकुंभ-2027 और चारधाम यात्रा पर संकट के संकेत, इंजीनियर्स ने दी चेतावनी

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

हरिद्वार/देहरादून । उत्तराखण्ड में डिप्लोमा इंजीनियर्स का आंदोलन लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर चल रही यह हड़ताल अब 13वें दिन और तेज हो गई है। खास बात यह है कि अब पेयजल, जल संस्थान और ऊर्जा विभाग जैसे आवश्यक सेवाओं से जुड़े अभियंता भी इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।


उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले प्रदेशभर में चल रहे इस आंदोलन की शुरुआत फरवरी माह में हुई थी। महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार, 23 फरवरी 2026 को देहरादून में एक विशाल रैली निकालकर सचिवालय कूच किया गया था और मुख्यमंत्री को 27 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बावजूद शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से इंजीनियर्स में भारी नाराजगी व्याप्त है।
इसके बाद 9 मार्च से 20 मार्च तक जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन किए गए, लेकिन जब तब भी कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 23 मार्च से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी गई।  हड़ताल के 10वें दिन, यानी 1 अप्रैल से आवश्यक सेवाओं से जुड़े अभियंता भी इस आंदोलन में कूद पड़े हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
हरिद्वार और रुड़की में बड़ी संख्या में इंजीनियर्स धरने पर बैठे हैं। महासंघ के नेताओं का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है, जिससे मजबूर होकर उन्हें यह कठोर कदम उठाना पड़ा है।
इंजीनियर्स की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगतियों को दूर करना, पदोन्नति प्रक्रिया में सुधार, एसीपी के तहत ग्रेड पे में वृद्धि, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और ऊर्जा विभाग में समान ग्रेड पे लागू करना शामिल है। इसके अलावा फील्ड स्टाफ की पर्याप्त भर्ती, कार्य के दौरान दुर्घटना बीमा की व्यवस्था और बाहरी एजेंसियों को कार्य सौंपने पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।वही उरेड़ा जेई शिल्पी ने  उरेड़ा में कनिष्ठ अभियंताओं को 4200 ग्रेड पे वेतनमान जबकि विज्ञपति 4600 पर जारी किया जाये,

ई प्रभात ने आवास विभाग के कनिष्ठ  अभियंताओं को NPS का लाभ व ट्रेजरी से सेलरी की मांग की है। 10,16 एवम26 साल की सेवा पदोन्नत वेतनमान की मांग की है । महासंघ ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले बड़े धार्मिक और विकासात्मक आयोजन प्रभावित हो सकते हैं। इनमें अर्धकुंभ-2027, चारधाम यात्रा और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। ऐसे में यदि व्यवस्थाएं बाधित होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और शासन प्रशासन की होगी।
धरना सभा की अध्यक्षता इंजीनियर आकाश झिंझानिया ने की, जबकि संचालन इंजीनियर देवेंद्र कुमार द्वारा किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में अभियंता और महासंघ के पदाधिकारी मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।कार्यक्रम में इं० मंगल सिंह नेगी (जनपद सचिव), इं० संदीप (शाखा अध्यक्ष), इं० कीर्तिवर्धन नेगी,ई०प्रभात ,ई० कमलेश रावत,इं० मनमोहन सिंह, इं० आलोक सिंह, इं० अनिल शर्मा, इं० प्रदीप चौहान, इं० शान्ति कुमार सिंह, इं० निहारिका अग्रवाल, इं० अनीता भण्डारी, इं० प्रियंका शर्मा, इं० अरविन्द जोशी, इं० सी० एल० भारती आदि सदस्य उपस्थित रहे।प्रदेश में बढ़ते इस आंदोलन ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि सरकार कब तक इस मुद्दे का समाधान निकाल पाती है या आंदोलन और व्यापक रूप लेता है।

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