इमलीखेड़ा के विशाल दंगल में ग्रामीण प्रतिभाओं का दमखम, इंजीनियर चैरब जैन ने किया शुभारंभ

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। क्षेत्र के इमलीखेड़ा गांव में आयोजित विशाल दंगल प्रतियोगिता में ग्रामीण खेल परंपरा और युवाओं के उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे युवा भाजपा नेता, वरिष्ठ समाजसेवी एवं फोनिक्स यूनिवर्सिटी के चेयरमैन इंजीनियर चैरब जैन ने दंगल का फीता काटकर शुभारंभ किया और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। अपने संबोधन में इंजीनियर चैरब जैन ने कहा कि एक स्वस्थ समाज में ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों से निकलने वाले खिलाड़ी और पहलवान न केवल अपने क्षेत्र का नाम रोशन करते हैं, बल्कि देश के लिए भी गौरव का प्रतीक बनते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेल केवल शारीरिक मजबूती का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और आत्मविश्वास का भी प्रतीक हैं। दंगल जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताएं युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करती हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा युवाओं को खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं और पैकेज प्रदान किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे प्रतिभाशाली युवा अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं, जो गर्व की बात है।
इंजीनियर चैरब जैन ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन सामाजिक समरसता को भी मजबूत करते हैं। दंगल में विभिन्न गांवों और जिलों से आए पहलवानों ने दमखम दिखाते हुए दर्शकों का मन मोह लिया। मुकाबले रोमांचक रहे और हर दांव-पेंच पर दर्शकों की तालियों से मैदान गूंज उठा।
कार्यक्रम के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज सैनी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि खेलों को बढ़ावा देना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो केवल मंच और प्रोत्साहन की। उन्होंने युवाओं से नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर खेलों की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया।
इस अवसर पर जुनैद मलिक, राजा, शिवा स्नेही, सत्यम कुमार, पप्पू कश्यप और अरुण पाल सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
दंगल प्रतियोगिता देर शाम तक चली, जिसमें विजेता पहलवानों को पुरस्कार और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। पूरे आयोजन में उत्साह, अनुशासन और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। इमलीखेड़ा का यह दंगल एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि ग्रामीण भारत की खेल परंपरा आज भी जीवंत है और युवाओं में राष्ट्र निर्माण की अपार संभावनाएं छिपी हैं।






