हरिद्वार में प्लास्टिक प्रतिबंध लागू जिलाधिकारी मयूर दीक्षित का बड़ा निर्णय , नियम तोड़ने वालों पर लगेगा जुर्माना

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
जनपद हरिद्वार में पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने अनाधिकृत प्लास्टिक की बिक्री और उपयोग पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री की बिक्री, उपयोग तथा प्लास्टिक अपशिष्ट को खुले में या सामान्य कूड़े में फेंकने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
यह आदेश पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग, उत्तराखण्ड शासन के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य जनपद में प्लास्टिक प्रदूषण पर नियंत्रण स्थापित करना, स्वच्छता को बढ़ावा देना और पर्यावरण के संरक्षण व संवर्धन को सुनिश्चित करना है।
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार नगर क्षेत्रों में जुर्माना लगाने की जिम्मेदारी नगर आयुक्त, स्थानीय निकायों के कार्यकारी अधिकारियों या उनके द्वारा नामित अधिकारियों को सौंपी गई है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि नामित अधिकारी का पद सैनेट्री सुपरवाइजर से नीचे का नहीं होना चाहिए। ये अधिकारी प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग, बिक्री और प्लास्टिक कचरे के अनुचित निस्तारण के मामलों में मौके पर ही कार्रवाई कर सकेंगे।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रशासन ने स्पष्ट अधिकार निर्धारण किया है। ग्राम पंचायत स्तर पर सचिव एवं ग्राम पंचायत विकास अधिकारी को जुर्माना लगाने हेतु अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त विकास खंड स्तर पर संबंधित क्षेत्र पंचायत के सचिव तथा सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को भी कार्रवाई का अधिकार प्रदान किया गया है। इससे अब गांवों में भी प्लास्टिक प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने आम नागरिकों, व्यापारियों और दुकानदारों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री का उपयोग बंद करें और वैकल्पिक पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को अपनाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार जुर्माना और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का मानना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक और अन्य प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री पर्यावरण, जल स्रोतों और पशु-पक्षियों के लिए गंभीर खतरा हैं। प्लास्टिक कचरा नालियों को जाम करता है, जलभराव की समस्या उत्पन्न करता है और अंततः मिट्टी तथा जल की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। ऐसे में यह अभियान स्वच्छ और स्वस्थ हरिद्वार के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जनपद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे नियमित निरीक्षण, जनजागरूकता अभियान और सख्त प्रवर्तन के माध्यम से इस आदेश को प्रभावी बनाएं। साथ ही नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा गया है कि सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।






