आईआईटी रुड़की में ‘एहेड2025’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं पाँच-दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन

(ब्योरो – दिलशाद खान।KNEWS18)
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में नीति-प्रासंगिक एवं साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘एहेड2025’ (AHEAD 2025) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और पाँच-दिवसीय क्षमता-वर्धन कार्यशाला का सफल आयोजन किया। इस आयोजन ने सार्वजनिक नीति को दिशा देने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने तथा सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने में अकादमिक संस्थानों की भूमिका को एक बार फिर रेखांकित किया।

आईआईटी रुड़की की एहेड (AHEAD) प्रयोगशाला द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से अग्रणी विद्वानों, नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और शोधकर्ताओं ने सहभागिता की। सम्मेलन का संयोजन एहेड प्रयोगशाला के संस्थापक एवं संचालक डॉ. प्रताप सी. मोहंती द्वारा किया गया, जबकि डॉ. मनीष के. अस्थाना सह-संयोजक रहे। आयोजन को भारत सरकार की राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन से समर्थन प्राप्त हुआ तथा मेमोरी एंड एंग्ज़ायटी रिसर्च ग्रुप का सहयोग रहा।
सम्मेलन का मुख्य विषय “स्वास्थ्य और विकास में वैश्विक व्यवधान: चुनौतियाँ, नवाचार और इक्कीसवीं सदी के लिए मार्ग” रहा। इसके अंतर्गत स्वास्थ्य प्रणालियों की लचीलापन क्षमता, जलवायु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य, स्वास्थ्य वित्तपोषण, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, तकनीकी नवाचार, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियाँ तथा क्षेत्रीय और लैंगिक असमानताओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन में कुल दस विषयगत ट्रैक शामिल किए गए, जिनमें पोषण और मानव पूंजी, वृद्धावस्था और कल्याण, स्वास्थ्य व्यवहार, व्यावसायिक स्वास्थ्य और संरचनात्मक असमानताएँ प्रमुख रहीं।
उद्घाटन सत्र को आईआईटी रुड़की के अंतरराष्ट्रीय संबंध अधिष्ठाता प्रो. वी. सी. श्रीवास्तव, एम्स ऋषिकेश के हृदय रोग विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) भानु दुग्गल तथा मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रो. स्मिता झा ने संबोधित किया। वक्ताओं ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और सामाजिक रूप से उत्तरदायी शासन में अकादमिक अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन में प्रो. साबु पद्मदास (यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्प्टन, यूके), डॉ. मार्गरेट त्रियाना (विश्व बैंक), डॉ. सुमन सेठ (यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, यूके), प्रो. प्रकाश सी. कांडपाल और प्रो. दिब्येंदु मैती जैसे प्रतिष्ठित विद्वानों ने मुख्य भाषण और आमंत्रित व्याख्यान दिए। विश्व बैंक, यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम (अमेरिका), आईआईटी कानपुर, जेएनयू और बीएचयू सहित अनेक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही।
सभी शोध पत्रों की कठोर द्वि-अंध सहकर्मी समीक्षा की गई। सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार डॉ. बसंत के. पांडा (पॉपुलेशन काउंसिल, भारत) और तनिषा (लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी, यूके) को प्रदान किए गए। समापन सत्र में घोषणा की गई कि एहेड का अगला संस्करण 14 से 16 दिसंबर 2026 तक आईआईटी रुड़की में आयोजित किया जाएगा।
सम्मेलन के साथ-साथ “स्वास्थ्य और कल्याण में बड़े-पैमाने के डेटा विश्लेषण” विषय पर आयोजित पाँच-दिवसीय कार्यशाला ने युवा शोधकर्ताओं की विश्लेषणात्मक क्षमताओं को सशक्त किया। एहेड2025 के माध्यम से आईआईटी रुड़की ने स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में अकादमिक अनुसंधान, नीति और सामाजिक प्रभाव के बीच एक मजबूत सेतु स्थापित किया है।

