कलयुग में भगवान शिव की भक्ति प्रदान करती है विशेष शांति: आचार्य रमेश सेमवाल
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की। ज्योतिष गुरुकुलम, रुड़की में आयोजित श्रीशिव महापुराण कथा के पंचम दिवस श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि कलयुग में भगवान शिव की भक्ति मनुष्य को विशेष शांति प्रदान करने वाली है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य के जीवन में तनाव, मोह, झूठ, कपट और अनेक प्रकार के विकार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे समय में भगवान शिव की आराधना और श्रीशिव महापुराण कथा का श्रवण मन को शुद्ध करने तथा जीवन में सकारात्मकता लाने का श्रेष्ठ माध्यम है।
आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान की भक्ति केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन, श्रद्धा और निष्ठा के साथ करनी चाहिए। जब मनुष्य पूर्ण विश्वास के साथ भगवान शिव का स्मरण करता है तो उसके भीतर आत्मिक शक्ति का संचार होता है और वह जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य के साथ कर सकता है।
उन्होंने कहा कि श्रीशिव महापुराण केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, संस्कार, सदाचार और भक्ति का मार्ग दिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है। इसके श्रवण से मनुष्य को जीवन के चार पुरुषार्थ—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—की प्राप्ति का मार्ग समझने का अवसर मिलता है। भगवान शिव की आराधना मनुष्य को सत्य के मार्ग पर चलने और अपने आचरण को बेहतर बनाने की प्रेरणा देती है।
कथा के पंचम दिवस आचार्य रमेश सेमवाल महाराज ने माता सती के चरित्र का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। इसके साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भगवान शिव-पार्वती के पवित्र दांपत्य और सनातन परंपरा में उसके महत्व से परिचित कराया। उन्होंने भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के जन्म की कथा भी सुनाई तथा भगवान शिव के परिवार की दिव्यता और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ मौजूद रहे। कथा व्यास द्वारा भगवान शिव की महिमा का वर्णन किए जाने पर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। पूरा कथा स्थल हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से श्रीशिव महापुराण का श्रवण किया और भगवान शिव के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान शिव की भक्ति के साथ सत्य, संयम, संस्कार और सदाचार को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भक्ति मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाती है और जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। कथा के समापन पर उपस्थित भक्तों ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तगण एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।
