गंगा किनारे गाने की तमन्ना रह गई अधूरी Asha Bhosle का सपना नहीं हुआ साकार

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की/हरिद्वार। भारतीय संगीत जगत की महान गायिका और स्वर कोकिला Asha Bhosle की हरिद्वार में गंगा तट पर गायन करने की हार्दिक इच्छा अधूरी रह गई। उनके आकस्मिक निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर है। इसी क्रम में अंतर्राष्ट्रीय शायर एवं उत्तराखंड उर्दू अकादमी के पूर्व अध्यक्ष अफजल मंगलोरी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके इस अधूरे अरमान को याद किया।
अफजल मंगलोरी ने बताया कि आशा भोसले जी की दिली ख्वाहिश थी कि वह हरिद्वार में मां गंगा के किनारे एक भव्य संगीत महफिल सजाएं और उसमें गंगा आरती एवं स्तुति गाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करें। उन्होंने कहा कि आशा जी ने दुनिया के बड़े-बड़े मंचों पर अपनी गायकी का लोहा मनवाया, लेकिन उनके दिल में हरिद्वार में प्रस्तुति देने की एक विशेष इच्छा थी, जो अब अधूरी रह गई।
मंगलोरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व उनकी मुलाकात आशा भोसले जी से मुंबई के यशराज स्टूडियो में हुई थी। यह मुलाकात उनके एक शिष्य मित्र प्रदीप शर्मा के गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान हुई थी। इस दौरान उन्हें आशा जी के साथ निकटता से बातचीत करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि जब आशा जी को यह ज्ञात हुआ कि उनका संबंध उत्तराखंड के हरिद्वार से है, तो वह अत्यंत प्रसन्न हुईं और उन्होंने अपने मन की इच्छा व्यक्त की।
अफजल मंगलोरी के अनुसार, आशा जी ने कहा था कि उन्होंने देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर अनेक कार्यक्रम किए हैं, लेकिन हरिद्वार में गंगा तट पर गायन करने का सपना उनके दिल के बेहद करीब है। उन्होंने इस इच्छा को पूरा करने की उम्मीद भी जताई थी।
मंगलोरी ने आगे बताया कि आगामी हरिद्वार कुंभ के अवसर पर आशा भोसले जी को आमंत्रित करने के लिए उन्होंने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से भी आग्रह किया था। इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री स्तर पर विचार-विमर्श किया जाना था, लेकिन इससे पहले ही उनके निधन की दुखद खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
इस दुखद अवसर पर उत्तराखंड नागरिक सम्मान समिति, कलम साधना फाउंडेशन सहित कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने आशा भोसले जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
गौरतलब है कि आशा भोसले जी ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी मधुर आवाज से करोड़ों दिलों पर राज किया। उनका हरिद्वार में गंगा तट पर गायन का सपना भले ही अधूरा रह गया हो, लेकिन उनकी आवाज और यादें हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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