इमली रोड से निकला शिया समुदाय का ताजिया, सीओ सुमित पांडेय ने कहा— इमाम हुसैन का बलिदान सत्य, न्याय और इंसानियत की मिसाल

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की। मोहर्रम के पावन अवसर पर रुड़की नगर में श्रद्धा, आस्था, बलिदान और गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत संगम देखने को मिला। नगर के विभिन्न क्षेत्रों से ताजियों एवं अखाड़ों के भव्य जुलूस पारंपरिक मार्गों से होते हुए मुख्य बाजार और नहर पुल तक पहुंचे तथा देर शाम अपने निर्धारित गंतव्यों की ओर रवाना हुए। पूरे मार्ग में जगह-जगह विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं सभी समुदायों के लोगों द्वारा सबील लगाकर शरबत, ठंडा पानी और अन्य पेय पदार्थ वितरित किए गए। इस सेवा कार्य की लोगों ने सराहना करते हुए इसे सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल बताया।
इमली रोड स्थित महिगिरान इमामबाड़े से शिया समुदाय के सैकड़ों अकीदतमंदों ने मातम, नोहाख्वानी और मरसियों के बीच ताजिया जुलूस निकाला। कर्बला पहुंचकर उन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी शहादत को याद करते हुए इंसाफ, सच्चाई और मानवता के लिए दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।

इमली रोड पर अंजुमन अखाड़ा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सीओ कलियर-भगवानपुर सुमित पांडेय ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय, अत्याचार और अधिनायकवाद के विरुद्ध सत्य एवं इंसानियत की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रभु श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान बुद्ध ने अपने जीवन और शिक्षाओं से सत्य का मार्ग दिखाया, उसी प्रकार इमाम हुसैन की कुर्बानी भी मानवता के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। उन्होंने कहा कि सभी धर्म प्रेम, शांति, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देते हैं तथा मोहर्रम हमें मानवीय संवेदनाओं और आपसी सद्भाव को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी ईश्वर लाल शास्त्री ने की, जबकि संयुक्त अखाड़ा परिषद के संरक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय शायर अफजल मंगलोरी ने संचालन करते हुए कहा कि मोहर्रम, कांवड़ यात्रा, होली, दीपावली और दशहरा जैसे सभी पर्व भारत की साझा संस्कृति और सामाजिक एकता के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भारत की धरती सदैव “वसुधैव कुटुंबकम” और “सर्वधर्म समभाव” का संदेश पूरे विश्व को देती रही है।
इस अवसर पर शिया समुदाय की ओर से मौलाना हसन हैदर, हसनैन जाफरी, नसीम हैदर, शानू अली, अब्बास हैदर और मोहम्मद रजा सहित अन्य वक्ताओं ने इमाम हुसैन की शहादत पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।
मोहर्रम के जुलूस में साबरी अखाड़ा, अकबरी अखाड़ा, शाने अकबरी अखाड़ा, इंडियन अंजुमन अखाड़ा तथा अंबर तालाब ताजिया कमेटी सहित अनेक अखाड़ों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं। इंडियन अंजुमन अखाड़ा की ओर से प्रणय प्रताप सिंह, सलमान फरीदी, अकरम अली, मोहसिन अल्वी, राजू शास्त्री, चौधरी अब्दुल मलिक, साबिर खलीफा, इरशाद, इमरान नईम, रिजवान, सलीम अहमद और नफीसुल हसन ने पुलिस अधिकारियों, खलीफाओं, उस्तादों एवं अतिथियों का पगड़ी बांधकर सम्मान किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम रहे और मोहर्रम का आयोजन शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

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