आईआईटी रुड़की ने विकसित किया भारत और दक्षिण एशिया के लिए 10 किलोमीटर रेज़ोल्यूशन वाला जलवायु डेटासेट

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

जलवायु जोखिम आकलन, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अनुकूलन रणनीतियों में मिलेगा बड़ा सहयोग
Indian Institute of Technology Roorkee ने भारतीय उपमहाद्वीप के लिए “इंड्रा-सीएमआईपी6” नामक एक अत्याधुनिक हाई-रेज़ोल्यूशन जलवायु प्रक्षेपण डेटासेट विकसित किया है। यह ओपन-एक्सेस डेटासेट लगभग 10 किलोमीटर स्थानिक रेज़ोल्यूशन पर दैनिक वर्षा और तापमान से जुड़ी ऐतिहासिक एवं भविष्य की जलवायु परिस्थितियों का विस्तृत प्रक्षेपण उपलब्ध कराता है।
आईआईटी रुड़की के जलविज्ञान विभाग द्वारा विकसित यह डेटासेट स्थानीय स्तर पर जलवायु अनुकूलन, आपदा तैयारी और जोखिम आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि वैश्विक जलवायु मॉडल भारत की जटिल भौगोलिक संरचना, मानसूनी परिवर्तनशीलता और क्षेत्रीय जलवायु चरम स्थितियों को पर्याप्त सटीकता से प्रदर्शित नहीं कर पाते, जबकि “इंड्रा-सीएमआईपी6” इस कमी को काफी हद तक दूर करता है।
भारत में लगातार बढ़ते तापमान, अनियमित मानसून, शहरी बाढ़, जल संकट और कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए जिला और नदी बेसिन स्तर पर सटीक जलवायु आंकड़ों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। ऐसे में यह डेटासेट नीति-निर्माताओं, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, कृषि विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित जर्नल Nature Portfolio की पत्रिका “साइंटिफिक डेटा” में प्रकाशित हुआ है। इसमें 14 सीएमआईपी6 वैश्विक जलवायु मॉडलों के आउटपुट को “डबल बायस-करेक्टेड कंस्ट्रक्टेड एनालॉग (डीबीसीए)” तकनीक के जरिए डाउनस्केल किया गया है, जिससे दैनिक मौसम परिवर्तनशीलता, अत्यधिक वर्षा और तापमान की चरम स्थितियों का अधिक सटीक अनुमान संभव हो पाया है।
डेटासेट में न्यूनतम और अधिकतम तापमान के साथ-साथ दैनिक वर्षा के आंकड़े 0.1° × 0.1° रेज़ोल्यूशन पर उपलब्ध हैं। इसमें मल्टी-मॉडल एंसेंबल और व्यक्तिगत मॉडल आउटपुट दोनों शामिल किए गए हैं, जिससे विभिन्न जलवायु परिदृश्यों और संभावित जोखिमों का बेहतर आकलन किया जा सकता है।
“इंड्रा-सीएमआईपी6” में चार प्रमुख “शेयर्ड सोशल-इकोनॉमिक पाथवे (एसएसपी)” शामिल किए गए हैं, जिनमें कम उत्सर्जन वाले भविष्य से लेकर अत्यधिक उच्च उत्सर्जन वाले परिदृश्य तक का अध्ययन किया गया है। इन आंकड़ों के माध्यम से वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि भविष्य में भारत में हीटवेव, अत्यधिक वर्षा, सूखा और अन्य जलवायु जोखिम किस प्रकार बदल सकते हैं।
लगभग 2.4 टेराबाइट आकार वाला यह डेटासेट वर्तमान में भारतीय उपमहाद्वीप के लिए उपलब्ध सबसे विस्तृत ओपन जलवायु डेटा संसाधनों में से एक माना जा रहा है। इसे शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और नीति निर्माताओं के उपयोग के लिए ओपन-एक्सेस रूप में उपलब्ध कराया गया है।
आईआईटी रुड़की के जलविज्ञान विभाग के प्रोफेसर Ankit Agrawal ने कहा कि भारत में जलवायु जोखिम अत्यंत स्थानीयकृत हैं, विशेषकर मानसून और पर्वतीय क्षेत्रों में। ऐसे में सूक्ष्म स्तर के जलवायु प्रक्षेपण योजनाकारों और नीति-निर्माताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ओपन-एक्सेस डेटासेट वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रभावी जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को मजबूत करेंगे।
वहीं, आईआईटी रुड़की के निदेशक Kamal Kishore Pant ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और वैज्ञानिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे समाज के लिए विश्वसनीय एवं सुलभ ज्ञान संसाधन विकसित करें। उन्होंने कहा कि “इंड्रा-सीएमआईपी6” जलवायु सहनशीलता, सतत विकास और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को समर्थन देने की दिशा में आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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