आईआईटी रुड़की और लघु उद्योग भारती का संयुक्त कदम: सतत उत्पादन और नवाचार को नई दिशा

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की, उत्तराखंड | 24 अप्रैल 2026 — सतत विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में आईआईटी रुड़की ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए लघु उद्योग भारती (LUB), उत्तर प्रदेश के सहयोग से अपने सहारनपुर परिसर में “लकड़ी और प्लास्टिक उत्पादों में डिज़ाइन हस्तक्षेप” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को डिज़ाइन, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से सशक्त बनाना रहा।
कार्यशाला में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और डिज़ाइन विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उत्पाद विविधीकरण, सतत सामग्री के उपयोग और नवाचारी डिज़ाइन समाधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से लकड़ी, हस्तशिल्प और पॉलिमर-आधारित उत्पादों के क्षेत्र में नई संभावनाओं को तलाशने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन लघु उद्योग भारती के प्रमुख पदाधिकारियों—अनुपम गुप्ता, अंकित गोयल, राजेश जैन, सुधाकर अग्रवाल, वरुण अग्रवाल और राजेश गुप्ता—द्वारा किया गया। इस अवसर पर आईआईटी रुड़की के वरिष्ठ संकाय सदस्य जैसे प्रो. मिली पंत, प्रो. अपूर्ब्ब कुमार शर्मा, प्रो. इंदरदीप सिंह, प्रो. स्मृति सरस्वत और प्रो. संजय पाल सुले भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और संस्थान के कुलगीत के साथ हुई।
प्रो. अपूर्ब्ब कुमार शर्मा ने डिज़ाइन विभाग की शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बी.डेस., एम.डेस. और पीएचडी कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने उद्योगों को आईआईटी रुड़की के संसाधनों और विशेषज्ञता का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। वहीं, प्रो. इंदरदीप सिंह ने डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर की भूमिका और एमएसएमई मंत्रालय के तहत संस्थान के योगदान को रेखांकित किया।
प्रो. स्मृति सरस्वत ने उत्पाद विकास, डिज़ाइन नवाचार और सतत आजीविका से जुड़े कार्यों को प्रस्तुत किया, जबकि प्रो. संजय पाल सुले ने अपने विशेष प्रोसेस के माध्यम से विकसित किए गए सतत प्लास्टिक कंपोजिट उत्पादों को साझा किया।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि इस प्रकार के उद्योग-अकादमिक सहयोग ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों में बदलने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल सतत डिज़ाइन को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय उद्योगों को मजबूत कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी गति देती है।
इस अवसर पर आईआईटी रुड़की और लघु उद्योग भारती के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत लकड़ी, हस्तशिल्प और प्लास्टिक उत्पादों के वाणिज्यीकरण के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया। इसका उद्देश्य इन उत्पादों की बाजार में उपयोगिता और विस्तार को बढ़ाना है।
कार्यक्रम में लगभग 40 औद्योगिक प्रतिनिधियों और 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया। आईआईटी रुड़की के छात्रों ने भी अपने प्रोजेक्ट और प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए, जो संस्थान के अंतःविषयक शोध और नवाचार की झलक पेश करते हैं।
यह पहल न केवल भारत सरकार की एमएसएमई आधारित विकास नीतियों के अनुरूप है, बल्कि वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ भी मेल खाती है। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिज़ाइन और तकनीक से जोड़कर यह सहयोग पर्यावरण के अनुकूल, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और सामाजिक रूप से प्रभावशाली समाधान विकसित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।






