आईआईटी रुड़की में अल्ट्रा लो हेड टर्बाइन अनुसंधान सुविधा का शुभारंभ, नेट ज़ीरो लक्ष्य को मिलेगी नई गति

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की, 21 अप्रैल 2026। भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को मजबूती देते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने अल्ट्रा लो हेड (ULH) और हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइनों के अनुसंधान एवं विकास के लिए एक अत्याधुनिक सुविधा की स्थापना की है। यह पहल देश के 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस नई सुविधा का उद्घाटन संतोष कुमार सारंगी, सचिव, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लघु जलविद्युत परियोजनाएं (SHP) भारत के ऊर्जा संक्रमण में अहम भूमिका निभाएंगी, विशेषकर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030-31 तक इस क्षेत्र में 50 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है।
आईआईटी रुड़की के जल एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग में स्थापित यह सुविधा दो प्रमुख भागों—अल्ट्रा लो हेड प्रयोगशाला और हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन (HKT) यूनिट—से मिलकर बनी है। यह परियोजना प्रो. अरुण कुमार के नेतृत्व में तथा एमएनआरई के वित्तीय सहयोग से विकसित की गई है। ULH प्रयोगशाला में ऐसे नवीन टर्बाइन डिजाइनों का परीक्षण किया जा रहा है, जो केवल 1 से 4 मीटर जल स्तर पर भी बिजली उत्पादन करने में सक्षम हैं। इसमें ऊर्ध्वाधर एवं क्षैतिज प्रोपेलर मॉडल और मछली-अनुकूल स्क्रू टर्बाइन शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में ऐसे स्थल मौजूद हैं, जैसे सिंचाई नहरों के फॉल्स और जल शोधन संयंत्रों के आउटफॉल, जहां पारंपरिक तकनीक से ऊर्जा उत्पादन संभव नहीं था। इस नई तकनीक से अब इन स्थलों का उपयोग कर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान की फ्लोटिंग सोलर तकनीक और जलाशय प्रबंधन में उसकी भूमिका भी चर्चा का केंद्र रही। आईआईटी रुड़की ने बांध सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और नीति अनुसंधान के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
संस्थान के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि यह सुविधा न केवल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी, बल्कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में भी भारत के योगदान को मजबूत करेगी। उन्होंने विज्ञान आधारित समाधानों के माध्यम से सतत और भरोसेमंद ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान सचिव संतोष कुमार सारंगी ने संस्थान में चल रहे हाइड्रो, सौर, बायोमास, हाइड्रोजन और ग्रिड एकीकरण से जुड़े अनुसंधानों की समीक्षा भी की। इसके साथ ही उन्होंने मोहम्मदपुर पावर हाउस और गंगा नदी पर स्थित चिल्ला जलविद्युत परियोजना का भी निरीक्षण किया।
यह नई अनुसंधान सुविधा भारत में अपनी तरह की पहली पहल है, जो लघु जलविद्युत प्रौद्योगिकियों के विकास को नई दिशा देगी और स्वच्छ, सस्ती एवं सुलभ ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।






