अक्षय तृतीया पर अखंड परमधाम गंगा घाट का लोकार्पण, मुख्यमंत्री धामी ने किया शुभारंभ

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

(हरिद्वार, 19 अप्रैल 2026।)
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हरिद्वार में एक भव्य और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वामी परमानन्द गिरि जी महाराज की 71वीं संन्यास जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर नमामि गंगे योजना के अंतर्गत निर्मित अखंड परमधाम गंगा घाट का विधिवत लोकार्पण भी किया गया। देशभर से पधारे संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक घाट के उद्घाटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना के निरंतर प्रवाह का प्रतीक है। उन्होंने स्वामी परमानन्द गिरि जी महाराज के जीवन को तप, त्याग और साधना का अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि उनके आदर्श समाज को सेवा, करुणा और मानव कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने परमपूज्या साध्वी ऋतम्भरा जी के योगदान का भी उल्लेख किया और कहा कि उनका जीवन राष्ट्र एवं सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि संतों का सानिध्य समाज को सही दिशा देता है और नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की बात कही। उन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इस दिशा में केदारखंड और मानसखंड मंदिर क्षेत्रों का विकास, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर तथा यमुनातीर्थ स्थलों के पुनरुद्धार जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना भी की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने, धर्मांतरण विरोधी कानून और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जैसे कई अहम निर्णय लिए हैं, जो प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने में सहायक हैं। मुख्यमंत्री ने समाज के समग्र विकास के लिए आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर देते हुए सभी से संतों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अक्षय तृतीया के साथ ही चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि मां गंगा और मां यमुना के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं और सरकार की प्राथमिकता है कि सभी यात्रियों की यात्रा सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित हो। इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
कार्यक्रम में योग गुरु स्वामी रामदेव, साध्वी ऋतम्भरा, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी सहित अनेक संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति भाव के साथ हुआ।

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