उपजिलाधिकारी की पहल: सीधे घर पहुंची न्याय व्यवस्था, बुजुर्गों का भरण-पोषण न करने पर सख्ती

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
उपजिलाधिकारी न्यायालय रुड़की द्वारा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 के तहत एक सराहनीय पहल करते हुए कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। 60 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे नागरिक, जिनकी देखभाल उनके बच्चों या रिश्तेदारों द्वारा नहीं की जा रही थी, उन्हें त्वरित कानूनी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से यह विशेष कार्रवाई की गई।
इन मामलों में वादीगण के पुत्र या प्रतिवादी न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे थे, जिसके चलते न्यायालय की टीम स्वयं संबंधित वादियों के निवास स्थान पर पहुंची और वहीं सुनवाई करते हुए समस्याओं का समाधान किया। इस पहल से न केवल वरिष्ठ नागरिकों को राहत मिली, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता भी स्पष्ट रूप से सामने आई।
कार्रवाई के दौरान ग्राम बेलड़ा की निवासी श्रीमती जरीफन, पश्चिमी अंबर तालाब निवासी श्री सुनील वर्मा, आकाशदीप कॉलोनी निवासी श्रीमती किरणलता, मोहनपुर मोहम्मदपुर निवासी रामशरण तथा ग्राम ताशीपुर निवासी श्रीमती सरस्वती के मामलों का निस्तारण किया गया। इन सभी मामलों में मुख्य शिकायत यह थी कि उनके परिजन उनके भरण-पोषण में सहयोग नहीं कर रहे थे या उनके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा था।
मौके पर सुनवाई करते हुए उपजिलाधिकारी द्वारा संबंधित परिजनों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपने माता-पिता एवं वरिष्ठ परिजनों के जीवन-यापन में पूर्ण सहयोग करें। साथ ही यह भी आदेशित किया गया कि उनके साथ किसी प्रकार का अभद्र व्यवहार न किया जाए। इसके अतिरिक्त वादियों के अनुरोध पर यह भी निर्देश दिए गए कि उन्हें प्रतिमाह भोजन, चिकित्सा और अन्य आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन ने इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के प्रभारी निरीक्षक एवं थानाध्यक्ष को निर्देशित किया गया कि वे वादियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। साथ ही दैनिक पंजिका में प्रविष्टि करते हुए समय-समय पर उनसे संपर्क बनाए रखें और आवश्यकतानुसार सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराएं।
इस प्रकार की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि प्रशासन वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के प्रति गंभीर है और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने के लिए तत्पर है। उपजिलाधिकारी की इस पहल को क्षेत्र में सराहा जा रहा है, क्योंकि इससे बुजुर्गों को न्याय पाने के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ा और उन्हें तत्काल राहत मिली।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और परिवारों को अपने बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारी का एहसास होता है। प्रशासन की यह पहल भविष्य में भी जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को लाभ मिल सके।






