HRDA की कार्रवाई पर उठे सवाल, जन अधिकार पार्टी ने लगाए सांठ-गांठ के आरोप, आंदोलन की चेतावनी

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की/हरिद्वार। जिला हरिद्वार में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। जन अधिकार पार्टी (जनशक्ति) की राष्ट्रीय महासचिव हेमा भंडारी ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जबकि अंदरखाने अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठ-गांठ से अवैध गतिविधियों को संरक्षण मिल रहा है।
हेमा भंडारी ने कहा कि जिले में लगातार अवैध निर्माण और प्लाटिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन HRDA द्वारा इन पर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में शिकायतकर्ताओं को ही हतोत्साहित किया जाता है, जिससे वे सामाजिक दबाव में पीछे हट जाते हैं और अवैध कार्य करने वालों को खुली छूट मिल जाती है।
उन्होंने दावा किया कि हरिद्वार जिले में अब तक किसी भी बड़े अवैध निर्माण या बड़ी अवैध प्लाटिंग पर सख्त कार्रवाई, जैसे सीलिंग या पूर्ण ध्वस्तीकरण, नहीं की गई है। अधिकांश मामलों में केवल औपचारिकताएं पूरी कर दिखावा किया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अवैध कॉलोनियां तेजी से विकसित होकर बस चुकी हैं और क्षेत्र में अनियोजित कंक्रीट का विस्तार हो रहा है।
हेमा भंडारी ने इसे एक “प्रायोजित खेल” बताते हुए कहा कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी मिलकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। उनके अनुसार, जिले में अवैध प्लाटिंग और निर्माण कार्य एक “खुली दुकान” की तरह संचालित हो रहे हैं, जिस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है।
इस पूरे मामले को लेकर जन अधिकार पार्टी की ओर से आवास सचिव को विस्तृत शिकायत भेजी गई है। शिकायत में मांग की गई है कि HRDA द्वारा की जा रही खानापूर्ति पर तत्काल रोक लगाते हुए जिलेभर में विशेष अभियान चलाया जाए और सभी अवैध प्लाटिंग व निर्माण कार्यों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। शिकायत में कुछ मामलों को नमूने के तौर पर चिन्हित किया गया है, जबकि पार्टी का दावा है कि ऐसे सैकड़ों मामले जिले में सक्रिय हैं।
उन्होंने बताया कि 18 मार्च 2026 को पार्टी के प्रदेश सचिव द्वारा कुल 7 मामलों को चिन्हित करते हुए HRDA उपाध्यक्ष को शिकायत दी गई थी। ये सभी मामले लंबे समय से चल रहे अवैध निर्माण और प्लाटिंग से जुड़े हैं। इसके बावजूद अब तक की गई कार्रवाई केवल छोटी प्लाटिंगों—जैसे 5 से 15 बीघा तक—पर सीमित रही है, जबकि 100 से 150 बीघा तक की बड़ी अवैध प्लाटिंगों को नजरअंदाज किया गया है। इससे स्पष्ट रूप से मिलीभगत की आशंका बलवती होती है।
हेमा भंडारी ने कहा कि जिले में केवल योजनाबद्ध और नियमों के अनुरूप विकास कार्य ही होने चाहिए। अनियोजित और अवैध प्लाटिंग पर पूर्ण रोक लगाना आवश्यक है, अन्यथा भविष्य में आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी चेताया कि वर्तमान में जो प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है, वही भविष्य में इन कॉलोनियों को अवैध घोषित कर ध्वस्त कर सकता है, जिससे सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को होगा, जिन्होंने अपनी जीवनभर की पूंजी लगाई होती है।
अंत में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो जनहित में बड़ा आंदोलन किया जाएगा और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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