आईआईटी रुड़की की ऐतिहासिक पहल: व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति की दिशा में बड़ा कदम

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की, 14 फरवरी 2026। देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच आईआईटी रुड़की ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस कदम के साथ संस्थान ऐसा करने वाला पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बन गया है, जिसने मानसिक कल्याण को संस्थागत प्राथमिकता के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास शुरू किए हैं। इस नीति का पहला प्रारूप संस्थान के वेलनेस सेंटर द्वारा तैयार किया गया, जो छात्रों, शोधार्थियों और संपूर्ण संस्थान समुदाय के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कार्य करता है।
इस नीति निर्माण प्रक्रिया में छात्र कल्याण अधिष्ठाता, छात्र वेलनेस के सह-अधिष्ठाता, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों तथा बाहरी विशेषज्ञों की सामूहिक भागीदारी रही। संस्थान का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि संस्थागत जिम्मेदारी भी है, और इसी सोच के साथ एक समग्र नीति ढांचा तैयार किया जा रहा है।
इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए “सहयोग 2.0” नामक एक केंद्रित अंतर-आईआईटी संवाद आयोजित किया गया। इस संवाद का उद्देश्य विभिन्न आईआईटी संस्थानों के बीच अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना था, ताकि एक ऐसी नीति तैयार की जा सके जो व्यापक, व्यवहारिक और छात्र-केंद्रित हो। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों में लागू मानसिक स्वास्थ्य नीतियों, प्रशासनिक तंत्र और प्रोटोकॉल का गहराई से अध्ययन किया गया और उपयोगी सुझावों को शामिल करने पर जोर दिया गया।
“सहयोग 2.0” वर्ष 2024 में आयोजित “सहयोग” कार्यक्रम की सफलता पर आधारित रहा। यह आयोजन उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने से जुड़े हालिया न्यायिक और नीतिगत निर्देशों के अनुरूप भी रहा। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य प्रशासन, निवारक और प्रोत्साहक हस्तक्षेप, संकट की स्थितियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), वेलनेस सेंटर और काउंसलिंग सेल की भूमिकाओं तथा मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम के सहयोगात्मक सत्रों ने यह स्पष्ट किया कि छात्रों के लिए सुरक्षित, समावेशी और सहयोगी वातावरण तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य नीति केवल कागजी दस्तावेज न होकर ऐसी प्रणाली बने, जो व्यवहार में प्रभावी रूप से लागू हो सके और संस्थानों के भीतर संवाद, समर्थन और संवेदनशीलता को बढ़ाए।
इस अवसर पर प्रो. के.के. पंत ने कहा कि उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को मजबूत आधार बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “सहयोग 2.0” जैसी पहलें संस्थानों की सामूहिक जिम्मेदारी और संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न आईआईटी के प्रतिनिधियों के साथ देश के प्रतिष्ठित संस्थानों — एम्स ऋषिकेश, जीएमसीएच चंडीगढ़, आईएचबीएएस दिल्ली, केजीएमयू, टीआईएसएस, आईओपी कोलकाता, ओपी जिंदल और दिल्ली विश्वविद्यालय — के विशेषज्ञों की उपस्थिति ने चर्चा को और समृद्ध बनाया। एक सर्वोच्च न्यायालय अधिवक्ता और मानवविज्ञानी की भागीदारी ने नीति निर्माण को बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान किया।आईआईटी रुड़की की यह पहल न केवल संस्थान स्तर पर बल्कि पूरी आईआईटी प्रणाली में एक समान और प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य नीति के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह प्रयास आने वाले समय में देश के अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है, जिससे विद्यार्थियों के लिए अधिक सुरक्षित, संतुलित और मानसिक रूप से सशक्त शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा सके।






