पहाड़–मैदान की राजनीति पर सियासी संग्राम: समीर आलम ने आशीष नेगी पर साधा निशाना

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की/देहरादून। प्रदेश की राजनीति में पहाड़–मैदान के मुद्दे को लेकर एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश महासचिव समीर आलम ने उत्तराखंड क्रांति दल के नेता आशीष नेगी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लगातार पहाड़ और मैदान को बांटने की राजनीति कर रहे हैं, जिससे प्रदेश का सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है।
समीर आलम ने अपने बयान में कहा कि आशीष नेगी कभी पहाड़वाद की बात करते हैं तो कभी मैदानी क्षेत्रों के लोगों को गुरुकुल नरसन बॉर्डर के बाहर भेजने जैसी बातें करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान प्रदेश की एकता और भाईचारे के लिए घातक हैं। आलम ने सवाल उठाया कि आखिर आशीष नेगी को इस तरह के भड़काऊ बयान देने की छूट क्यों दी जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो व्यक्ति स्वयं कई मामलों में घिरा हो, उसे कानून व्यवस्था पर बोलने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। समीर आलम ने दावा किया कि आशीष नेगी के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं और जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे मुकदमे किन कारणों से दर्ज हुए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर इतने मामले दर्ज हों, उसका कानून व्यवस्था पर भाषण देना उचित नहीं लगता।
समीर आलम ने आगे कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी एकता और शांति से है। कुछ लोग पहाड़–मैदान के नाम पर समाज को विभाजित कर राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं, लेकिन प्रदेश की जनता इस मंशा को समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जैसे मैदानी जिलों को भी समान अधिकार और स्थायी मूल निवास प्रमाण पत्र को लेकर स्पष्ट नीति होनी चाहिए। इस मुद्दे पर भी उन्होंने आशीष नेगी और उनकी पार्टी से स्पष्ट रुख बताने की मांग की।
उन्होंने आशंका जताई कि कहीं न कहीं प्रशासनिक अधिकारियों को भी निशाना बनाकर माहौल को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। समीर आलम ने कहा कि देहरादून पुलिस के वर्तमान कप्तान अजय सिंह को भी अनावश्यक रूप से विवादों में घसीटा जा रहा है, जो ठीक नहीं है।
अंत में समीर आलम ने कहा कि पूरा उत्तराखंड एक है—न कोई केवल पहाड़ी है और न ही केवल मैदानी। “हम सब भाई हैं और यह प्रदेश हम सभी का है। किसी को भी हमारे शांत और सौहार्दपूर्ण वातावरण को खराब करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी,” उन्होंने कहा। प्रदेश में इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अन्य दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है, जिससे सियासी तापमान और बढ़ने की संभावना है।






