February 8, 2026

दिल्ली में बड़ा हादसा: गीजर विस्फोट के बाद हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह के सज्जादा नशीन सैयद मोहम्मद निजामी की दर्दनाक मौत

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक हज़रत ख्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया दरगाह परिसर के पास एक दर्दनाक हादसे में दरगाह के सज्जादा नशीन सैयद मोहम्मद निजामी की मौत हो गयी। यह हादसा बस्ती हज़रत निज़ामुद्दीन क्षेत्र में स्थित उनके आवास पर उस समय हुआ, जब बाथरूम में लगे इलेक्ट्रिक गीजर में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार 7 फरवरी को शाम करीब 5 बजे पीसीआर को बस्ती हज़रत निज़ामुद्दीन के अलवी चौक के पास स्थित हाउस नंबर 134-135 में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही निज़ामुद्दीन थाना पुलिस और दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर रवाना की गईं। जब टीम घटनास्थल पर पहुंची तो घर से धुआं निकल रहा था और मकान अंदर से बंद पाया गया।
दमकल कर्मियों ने दरवाजा तोड़कर आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि बाथरूम में लगे इलेक्ट्रिक गीजर में विस्फोट हुआ था, जिसकी वजह से आग भड़क गई और पूरे घर में धुआं फैल गया। इसी दौरान सज्जादा नशीन सैयद मोहम्मद निजामी बुरी तरह झुलस गए और दम घुटने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही दरगाह से जुड़े लोग, स्थानीय निवासी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। सैयद मोहम्मद निजामी निज़ामुद्दीन दरगाह के सज्जादा नशीन होने के साथ-साथ एक प्रतिष्ठित सूफी परंपरा के प्रतिनिधि थे। उनके निधन की खबर से सूफी समुदाय, उनके अनुयायियों और देश-विदेश के श्रद्धालुओं में गहरा शोक व्याप्त है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल यह एक हादसा प्रतीत होता है, लेकिन गीजर के विस्फोट के कारणों की तकनीकी जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गीजर में कोई तकनीकी खराबी थी या शॉर्ट सर्किट के कारण यह हादसा हुआ।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घरों में लगे इलेक्ट्रिक उपकरणों की नियमित जांच कराएं और सुरक्षा मानकों का पालन करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। सैयद मोहम्मद निजामी के निधन से निज़ामुद्दीन दरगाह और उससे जुड़ी सूफी परंपरा को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

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