सालियर–भगवानपुर बाईपास पर एनआईएच की बड़ी चूक,रोज दांव पर लग रही जिंदगियां एनआईएच पर फूटा छात्रों का गुस्सा

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
सालियर–भगवानपुर बाईपास पर बना अधूरा पैदल पुल अब लोगों की सुविधा नहीं, बल्कि जान के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। करीब एक साल पहले शुरू हुआ यह पैदल पुल आज तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है, जिससे रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले सैकड़ों लोगों को तेज रफ्तार हाइवे पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। छात्र, महिलाएं, बुजुर्ग, कर्मचारी और मरीज—सभी हर दिन जोखिम उठाकर सड़क पार कर रहे हैं, और किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
इस बाईपास के आसपास तीन प्रमुख कॉलेज स्थित हैं, जहां पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र रोजाना इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा आसपास के गांवों की महिलाएं, औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले कर्मचारी और अस्पताल जाने वाले मरीज भी इसी मार्ग से आते-जाते हैं। हाइवे पर भारी वाहनों की तेज आवाजाही और तेज रफ्तार के बीच सड़क पार करना किसी चुनौती से कम नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पहले भी कई बार छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
स्थानीय ग्रामीणों और छात्रों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुल का निर्माण एक तरफ से पूरा कर दिया गया है, जबकि दूसरी तरफ का काम अधूरा छोड़ दिया गया। जानकारी के अनुसार, पुल निर्माण में एक विद्युत लाइन बाधा बन रही है। विद्युत विभाग ने लाइन हटाने का एस्टीमेट बनाकर एनएचएआई को भेज दिया है, लेकिन भुगतान न होने के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस आपसी तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है।
छात्रों और ग्रामीणों की मांग है कि पुल पर केवल सीढ़ियां ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित रैंप भी बनाया जाए, ताकि मोटरसाइकिल और साइकिल आसानी से निकल सकें। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और असहाय लोगों को भी पुल का उपयोग करने में सुविधा मिलेगी। उनका कहना है कि सिर्फ सीढ़ियों वाला पुल हर वर्ग के लिए सुरक्षित और उपयोगी नहीं है।
पुल को लेकर छात्रों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। छात्रों ने एनएचएआई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया, तो वे धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। छात्रों का यह भी आरोप है कि अधूरे पुल पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जहां नशा और स्टंटबाजी होती है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो किसी भी बड़ी दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी। अब देखना यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कब नींद से जागता है और कब यह अधूरा पैदल पुल आम जनता के लिए सुरक्षित बन पाता है। फिलहाल, जनता की निगाहें एनएचएआई पर टिकी है।






