November 6, 2026

आईआईटी रुड़की ने डॉक्यूमेंट्री के जरिए दिखाई भारत की बदलती शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर

(ब्योरो दिलशाद खान KNEWS 18) 

डॉक्टोरल शोध पर आधारित फिल्म में अनुभवात्मक शिक्षा और गुरुकुल परंपरा का आधुनिक स्वरूप प्रस्तुत, शोधार्थी पारिसा एपलगार्थ ने किया निर्माण; 14 नवंबर को दूरदर्शन पर प्रसारण की संभावना

रुड़की, 06 नवंबर 2026। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने डॉक्टोरल शोध को आम जनमानस तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘Experiential Education: Learning from Transformative Schools in India’ शीर्षक से एक विशेष डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुत की है। लगभग 25 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से भारत की बदलती शिक्षा व्यवस्था, पारंपरिक गुरुकुल प्रणाली और आधुनिक समय में अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) की बढ़ती उपयोगिता को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है।

इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण आईआईटी रुड़की के प्रबंधन अध्ययन विभाग की शोधार्थी पारिसा एपलगार्थ ने अपने पीएचडी शोध के अंतर्गत किया है। उन्हें इस शोध कार्य में प्रो. अन्दलिब तारिक और प्रो. विनय शर्मा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। संस्थान के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत के नेतृत्व में प्रस्तुत इस फिल्म का प्रीमियर आईआईटी रुड़की परिसर में आयोजित किया गया। खास बात यह है कि डॉक्यूमेंट्री को दूरदर्शन पर राष्ट्रीय प्रसारण के लिए भी चयनित किया गया है। इसका प्रसारण बाल दिवस के अवसर पर 14 नवंबर 2026 को संभावित रूप से निर्धारित है।

डॉक्यूमेंट्री में देश के विभिन्न विद्यालयों, गुरुकुलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में किए गए क्षेत्रीय अध्ययन को शामिल किया गया है। फिल्म यह समझाने का प्रयास करती है कि शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक गतिविधियों, सवाल पूछने, स्वयं प्रयोग करने और अपने अनुभवों से सीखने के अवसर भी मिलने चाहिए।

प्रो. अन्दलिब तारिक ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य अनुभवात्मक शिक्षा को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखकर उसके व्यावहारिक स्वरूप और संभावनाओं को सामने लाना है। शोध में यह दर्शाया गया है कि जिज्ञासा, अनुभव, मार्गदर्शन और नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को नई दिशा दे सकती है।

वहीं, शोधार्थी एवं डॉक्यूमेंट्री की निर्माता पारिसा एपलगार्थ ने बताया कि विभिन्न विद्यालयों में उन्होंने बच्चों को निर्माण करते, सवाल पूछते और अपने परिवेश को समझते हुए देखा। उनका उद्देश्य इन अनुभवों को अकादमिक शोधपत्रों से आगे ले जाकर शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुंचाना है, ताकि शिक्षा के नए विकल्पों और संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हो सके।

डॉक्यूमेंट्री प्रीमियर के दौरान ‘भारत में अनुभवात्मक शिक्षा का भविष्य’ विषय पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। इसमें डॉ. भानु दुग्गल, कुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय; प्रो. आनंद श्रीवास्तव, कुलपति, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली तथा मौलिक भगत सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया। चर्चा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, व्यावसायिक एवं उच्च शिक्षा में अनुभवात्मक शिक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विचार रखे गए। कार्यक्रम में शिक्षा जगत, उद्योग जगत, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों सहित लगभग 175 लोगों ने सहभागिता की।

प्रबंधन अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनय शर्मा ने कहा कि अनुभव से अनुभूति और अनुभूति से जीवन को बेहतर बनाने की दिशा मिलती है। उनके अनुसार भारतीय ज्ञान प्रणाली और प्राचीन गुरुकुल परंपरा आधुनिक अनुभवात्मक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान कर सकती है।

यह डॉक्यूमेंट्री आईआईटी रुड़की के मैकेनिकल एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग की अनुभवात्मक अधिगम पहल का हिस्सा है, जिसे एनटीपीसी लिमिटेड का सहयोग प्राप्त है। संस्थान की यह पहल शोध को आम जनता से जोड़ने के साथ-साथ देश की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को लेकर नई बहस को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

प्रमुख खबरे

error: Content is protected !!