बीएसएम संस्थान पर किसका अधिकार? ब्राह्मण समाज ने प्रबंधन को दी आमने-सामने बैठने की चुनौती, दस्तावेज दिखाकर समाज ने उठाए प्रबंधन पर सवाल
(ब्योरो दिलशाद खान KNEWS 18)
रुड़की। बीएसएम शिक्षण संस्थान की संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। संस्थान को ब्राह्मण समाज की संपत्ति बताते हुए पिछले पांच दिनों से हरिद्वार रोड स्थित परशुराम भवन में धरने पर बैठे समाज के लोगों ने अब आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। इसी क्रम में धरनारत लोगों ने पत्रकार वार्ता कर संस्थान प्रबंधन की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब दिया और प्रदेश सरकार से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एसआईटी जांच कराने की मांग की।
पत्रकार वार्ता में सम्राट सुधा ने कहा कि बीएसएम शिक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 1934 में ब्राह्मण समाज ने सामूहिक प्रयासों और सहयोग से की थी। उनका आरोप है कि समय के साथ एक परिवार के लोगों ने संस्थान की व्यवस्था पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया और बीएसएम चैरिटेबल ट्रस्ट का गठन कर संस्थान की संपत्तियों पर अधिकार जमा लिया। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज के पास ऐसे अनेक दस्तावेज और महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद हैं, जिनसे करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति पर समाज के अधिकार से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय एसआईटी जांच कराई जाए, जिससे संस्थान की स्थापना, प्रबंधन व्यवस्था और संपत्तियों के स्वामित्व की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने यह भी मांग उठाई कि जांच पूरी होने तक संस्थान की संपत्तियों और व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए रिसीवर नियुक्त किया जाए, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे। सम्राट सुधा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और जांच नहीं कराई तो ब्राह्मण समाज आगामी चुनाव में भाजपा को समर्थन नहीं देगा।
सतीश शर्मा ने अध्यक्ष पद को लेकर दिया जवाब
पत्रकार वार्ता में सतीश शर्मा ने संस्थान प्रबंधन की ओर से उन्हें फर्जी अध्यक्ष बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से उन्हें अध्यक्ष चुना था। उन्होंने बीएसएम को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान करीब 70 प्रतिशत दस्तावेज फर्जी लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक इस मामले में कोई प्रभावी उच्च स्तरीय जांच सामने नहीं आई है। यदि संस्थान प्रबंधन एसआईटी जांच होने का दावा कर रहा है तो उसे जांच से संबंधित दस्तावेज और प्रमाण सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि सच्चाई सभी के सामने आ सके।
संस्थान प्रबंधन भी लगा चुका है गंभीर आरोप
गौरतलब है कि इससे पहले संस्थान के निदेशक रजनीश शर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर धरने पर बैठे लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। प्रबंधन ने धरनारत लोगों को ब्लैकमेलर बताते हुए दावा किया था कि इस प्रकरण में अब तक 51 जांच हो चुकी हैं और सभी में उनके आरोप निराधार पाए गए हैं। प्रबंधन ने सतीश शर्मा को भारतीय ब्राह्मण समाज का अध्यक्ष मानने से भी इनकार किया था।
आमने-सामने वार्ता की दी चुनौती
संस्थान प्रबंधन के आरोपों के जवाब में धरनारत लोगों ने पदाधिकारियों को आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वे अपने दावे के समर्थन में उपलब्ध सभी दस्तावेज और साक्ष्य सार्वजनिक करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि इस विवाद का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
पत्रकार वार्ता में डॉ. अनीता शर्मा, मनोज शर्मा, बिट्टू शर्मा, दीपक शर्मा, मास्टर बिजेंद्र सिंह, सतीश शर्मा, राजकुमार दुखी और विनय शर्मा सहित समाज के अनेक लोग मौजूद रहे।

