संयुक्त मजिस्ट्रेट रुड़की ने तहसीलदार एवं अपर तहसीलदार न्यायालयों का किया निरीक्षण
(ब्योरो दिलशाद खान KNEWS18) | हरिद्वार
रुड़की। तहसील स्तर पर न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से संयुक्त मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र शेट ने तहसील रुड़की स्थित तहसीलदार एवं अपर तहसीलदार न्यायालयों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति, पत्रावलियों के रख-रखाव तथा न्यायालयीन कार्यवाही की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए लंबित मामलों के त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया।
संयुक्त मजिस्ट्रेट ने निरीक्षण के दौरान न्यायालयों में संचालित कार्यों की समीक्षा की और अभिलेखों के रख-रखाव की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि न्यायालयीन कार्यों का संचालन निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाए। साथ ही, लंबित वादों के निस्तारण में अनावश्यक देरी से बचने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि वादकारियों को समय पर न्याय मिल सके।
सुनवाई की तारीख दर्ज करने में बरतें विशेष सावधानी
निरीक्षण के दौरान संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र शेट ने पेशकारों को निर्देश दिए कि न्यायालय में आगामी सुनवाई की तिथियां दर्ज करते समय विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वाद में सुनवाई की गलत तारीख दर्ज नहीं होनी चाहिए। वादकारियों और अधिवक्ताओं को सुनवाई की सही तिथि की जानकारी उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि सुनवाई की तारीखों में त्रुटि होने से वादकारियों एवं अधिवक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा न्यायालयीन कार्यवाही में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए प्रत्येक मामले में तिथि दर्ज करने और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को पूरी गंभीरता से पूरा किया जाए।
पुराने वादों के निस्तारण को मिलेगी प्राथमिकता
संयुक्त मजिस्ट्रेट ने लंबे समय से लंबित वादों की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हुए निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में नियमानुसार छोटी एवं निकटवर्ती तिथियां निर्धारित की जाएं। इससे पुराने वादों की नियमित सुनवाई हो सकेगी और उनके निस्तारण की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सकेगी।
उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिए कि लंबित मामलों की प्रभावी निगरानी की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी वाद के निस्तारण में अनावश्यक विलंब न हो। पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने और नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने पर भी जोर दिया गया।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश
संयुक्त मजिस्ट्रेट ने कहा कि न्यायालयीन कार्यों में पारदर्शिता, अनुशासन और समयबद्धता बनाए रखना आवश्यक है। सभी संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी गंभीरता से करें। पत्रावलियों का व्यवस्थित रख-रखाव किया जाए तथा न्यायालयों में संचालित कार्यवाही की प्रगति पर नियमित ध्यान दिया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालयों में आने वाले वादकारियों को अनावश्यक परेशानी न हो और उन्हें उनके मामलों से संबंधित सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए कार्यप्रणाली को व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ लंबित वादों के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
न्यायालयीन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य तहसील स्तर पर न्यायालयीन व्यवस्था को अधिक सुचारु बनाना, लंबित वादों की सुनवाई में तेजी लाना और कार्यवाही को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना रहा। संयुक्त मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए निर्देशों से न्यायालयों में अभिलेखों के बेहतर रख-रखाव, सुनवाई की तिथियों में शुद्धता तथा पुराने मामलों के नियमित निस्तारण पर जोर दिया गया है।
उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए न्यायालयीन कार्यों को प्रभावी ढंग से संपादित किया जाए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि वादकारियों को सुनवाई और मामले की प्रगति के संबंध में सही जानकारी मिलती रहे।
संयुक्त मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि लंबित वादों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसके लिए न्यायालयीन कार्यों में लापरवाही से बचते हुए पारदर्शिता, अनुशासन और जवाबदेही के साथ कार्य किया जाए।

