डॉ. नारायण सुब्बाराव हर्डिकर की 51वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, कांग्रेस सेवादल कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की। कांग्रेस सेवादल के संस्थापक, महान स्वतंत्रता सेनानी, पद्म विभूषण से सम्मानित एवं पूर्व सांसद डॉ. नारायण सुब्बाराव हर्डिकर जी की 51वीं पुण्यतिथि के अवसर पर रुड़की में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं एवं सेवादल कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके बताए सेवा, अनुशासन तथा राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा में कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव श्री सुधीर शांडिल्य, रुड़की के पूर्व प्रदेश महासचिव श्री सचिन गुप्ता, जिला अध्यक्ष श्री सुशील कश्यप सहित कांग्रेस एवं सेवादल के अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने डॉ. हर्डिकर के देश और समाज के प्रति योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताया।
कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश महासचिव कांग्रेस सेवादल उत्तराखंड राहुल सैनी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. हर्डिकर ने अपना पूरा जीवन राष्ट्रसेवा और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। उनका जीवन त्याग, अनुशासन, सेवा और गांधीवादी विचारधारा का प्रेरणादायी उदाहरण है।
पूर्व प्रदेश सचिव सचिन गुप्ता ने कहा कि डॉ. हर्डिकर का पूरा जीवन सेवा, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कांग्रेस सेवादल के माध्यम से अनुशासन और जनसेवा की भावना को मजबूत किया। हमें उनके आदर्शों को अपनाकर समाज और जरूरतमंदों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।
डॉ. नारायण सुब्बाराव हर्डिकर का जन्म 15 जुलाई 1889 को हुबली, कर्नाटक में हुआ था। पेशे से चिकित्सक होने के बावजूद उन्होंने देश की आजादी और सामाजिक सुधारों को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बनाया। वर्ष 1923 में उन्होंने कांग्रेस सेवादल की स्थापना कर देशभर में अनुशासित स्वयंसेवकों का मजबूत संगठन खड़ा किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सेवादल के कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह, जनजागरण, जुलूस और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. हर्डिकर ने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की तथा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई बार जेल भी गए। उन्होंने खादी, स्वदेशी, अस्पृश्यता उन्मूलन, हरिजन कल्याण, ग्रामीण शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया। गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने के साथ उन्होंने सामाजिक जागरूकता पर भी जोर दिया।
आजादी के बाद डॉ. हर्डिकर ने संसदीय जीवन में भी योगदान दिया। उन्हें वर्ष 1971 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनके जीवन और कार्यों के कारण उन्हें कर्नाटक के गांधी के रूप में भी याद किया जाता है।
सुधीर शांडिल्य ने कहा कि डॉ. हर्डिकर ने सेवादल के माध्यम से देश को अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ता दिए। सचिन गुप्ता ने उनके सेवा भाव को अपनाने की आवश्यकता बताई। जिला अध्यक्ष सुशील कश्यप ने कार्यकर्ताओं से जनता की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
राहुल सैनी ने कहा कि डॉ. हर्डिकर की पुण्यतिथि पर सेवादल के अनुशासन और सेवा के मूलमंत्र को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर महान स्वतंत्रता सेनानी को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
