लोन की सभी किस्तें चुकाने के बाद भी नहीं मिली एनओसी, किसान ने आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

नारसन/हरिद्वार। नारसन ब्लॉक के ग्राम कोटवाल निवासी किसान सलीम ने आईसीआईसीआई बैंक प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने अपने कमर्शियल लोन की सभी किस्तों का भुगतान कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद बैंक द्वारा उन्हें अब तक एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) जारी नहीं किया गया है। सलीम का आरोप है कि बैंक प्रबंधन पिछले कई महीनों से उन्हें एनओसी जारी करने के नाम पर लगातार बैंक के चक्कर लगवा रहा है, जिससे उन्हें मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सलीम ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 में आईसीआईसीआई बैंक से कमर्शियल लोन लिया था। उसी दौरान कोविड-19 महामारी के कारण देशभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई थीं, जिसका असर उनके व्यवसाय और आय पर भी पड़ा। इस कारण कुछ समय तक वह ऋण की कुछ किस्तें समय पर जमा नहीं कर सके। हालांकि, कोरोना काल समाप्त होने के बाद उन्होंने बैंक के साथ समन्वय बनाते हुए सभी बकाया किस्तों और देय राशि का भुगतान कर दिया था।
किसान सलीम का कहना है कि बैंक प्रबंधन ने उनके खाते में अतिरिक्त बकाया राशि दर्शाते हुए उनसे लाखों रुपये की वसूली किस्तों के माध्यम से कर ली। इसके बावजूद अब उनके ऋण खाते को दस्तावेजों में “सेटलमेंट” की श्रेणी में दिखाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने नियमित रूप से ऋण का भुगतान किया और बैंक की सभी शर्तों का पालन किया, तो उनके खाते को सेटलमेंट में दर्शाना पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
सलीम ने कहा कि किसी भी ऋण खाते का सेटलमेंट में दर्ज होना भविष्य में ग्राहक की बैंकिंग साख को प्रभावित करता है। इससे अन्य बैंकों या वित्तीय संस्थाओं से भविष्य में ऋण लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार का ऋण माफ नहीं कराया और न ही किसी विशेष समझौते के तहत भुगतान किया है, इसलिए उनके खाते को सेटलमेंट में दिखाना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने बताया कि वह हृदय रोग से भी पीड़ित हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद लगातार बैंक के चक्कर काट रहे हैं। बार-बार बैंक जाने और समस्या का समाधान न होने से उनका मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि बैंक अधिकारियों की उदासीनता के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
सलीम ने बैंक प्रबंधन से मांग की है कि उनके ऋण खाते की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और उन्हें तत्काल एनओसी जारी की जाए। उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वह मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों, बैंकिंग लोकपाल तथा अन्य संबंधित विभागों से करेंगे। साथ ही आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी अपनाएंगे।
किसान सलीम का कहना है कि बैंक प्रबंधन की कार्यशैली से उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। अब देखना यह होगा कि बैंक प्रबंधन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और पीड़ित किसान को कब तक राहत मिल पाती है।

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