गंगनहर मूर्ति विवाद पर गरमाई राजनीति, पूर्व मेयर गौरव गोयल ने विधायक पर लगाए गंभीर आरोप
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। गंगनहर किनारे महापुरुषों की मूर्तियों की स्थापना को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक रंग पकड़ता जा रहा है। इस मामले में पूर्व मेयर गौरव गोयल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नगर विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के सम्मान और उनकी विरासत को संजोने के उद्देश्य से उनके कार्यकाल में गंगनहर घाट पर विभिन्न महापुरुषों की मूर्तियां स्थापित करने का प्रस्ताव विधिक रूप से पारित किया गया था, जिस पर सिंचाई विभाग द्वारा उस समय कोई आपत्ति भी दर्ज नहीं की गई थी।
पूर्व मेयर गौरव गोयल ने आरोप लगाया कि नगर विधायक का यह रवैया नया नहीं है। उन्होंने कहा कि जब से विधायक नगर पालिका अध्यक्ष रहे हैं, तब से उनकी कार्यशैली यही रही है कि पहले संबंधित विभागों से नोटिस जारी करवाए जाते हैं और बाद में जनता तथा समाज विशेष की सहानुभूति प्राप्त करने के लिए उन्हीं कार्यों को दोबारा करवाने का श्रेय लिया जाता है।
उन्होंने हाल ही में हुए स्वर्णकार समाज की मूर्ति स्थापना के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मूर्ति स्थापना की अनुमति होने के बावजूद अप्रत्यक्ष रूप से नगर विधायक ने सिंचाई विभाग से मिलीभगत कर वहां बुलडोजर चलवाया। जब स्वर्णकार समाज ने इसका विरोध किया और नाराजगी जताई, तब विधायक ने खुद को समाज का हितैषी दिखाने के लिए दोबारा मूर्ति स्थापित कराने का आदेश पारित कराया। पूर्व मेयर ने इसे “राजनीतिक ड्रामेबाजी” और “झूठी हमदर्दी” करार दिया।
गौरव गोयल ने यह भी कहा कि विधायक का ऐसा व्यवहार पहले भी देखने को मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका अध्यक्ष रहते हुए विधायक ने कर्मचारियों के माध्यम से जनता पर भारी हाउस टैक्स बढ़ाकर नोटिस भिजवाए थे। बाद में जब तत्कालीन सभासदों और आम जनता ने इसका विरोध किया और हंगामा खड़ा हुआ, तब सहानुभूति लेने के लिए आधा हाउस टैक्स माफ करने की घोषणा की गई थी।
पूर्व मेयर ने दावा किया कि नगर और क्षेत्र की जनता अब इन राजनीतिक हथकंडों को भली-भांति समझ चुकी है और आने वाले चुनाव में सभी समाज के लोग इसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि नगर विधायक के “ओछे हथकंडों” और “राजनीतिक चालों” से जनता पूरी तरह परिचित हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में शहीद चंद्रशेखर आजाद, कश्यप समाज, संत रविदास, भगवान वाल्मीकि, भगवान परशुराम सहित अन्य महापुरुषों की मूर्तियों के प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। इन प्रस्तावों का रिकॉर्ड नगर निगम में उपलब्ध है, जिसे कोई भी व्यक्ति देख सकता है।अंत में पूर्व मेयर गौरव गोयल ने कहा कि जब पहले से विधिक प्रस्ताव मौजूद हैं, तब जनता को भ्रमित कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास एक जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता। उन्होंने नगर विधायक से सर्वसमाज और नगर की जनता से माफी मांगने की मांग भी की।
