गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग तेज, जन अधिकार पार्टी ने आंदोलन को दिया समर्थन

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
देहरादून, 05 मई। उत्तराखंड की स्थाई राजधानी को लेकर एक बार फिर सियासी और जनआंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। देहरादून के एकता विहार स्थित धरना स्थल पर गैरसैण को राज्य की स्थाई राजधानी घोषित करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को जन अधिकार पार्टी – जनशक्ति ने अपना पूर्ण समर्थन दे दिया है। पार्टी के इस कदम से आंदोलन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव हेमा भंडारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल धरना स्थल पर पहुंचा और स्थाई राजधानी गैरसैण संघर्ष समिति के सदस्यों से मुलाकात कर उन्हें समर्थन पत्र सौंपा। इस दौरान उन्होंने आंदोलनकारियों की मांगों को न्यायोचित बताते हुए कहा कि गैरसैण उत्तराखंड राज्य आंदोलन की मूल भावना का प्रतीक है और इसे स्थाई राजधानी बनाए बिना राज्य की अवधारणा अधूरी है। धरना स्थल पर मौजूद संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि गैरसैण को राजधानी बनाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन अब तक किसी भी सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य गठन के 24 वर्षों बाद भी गैरसैण को स्थाई राजधानी का दर्जा न मिलना खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों के साथ अन्याय है। उनका आरोप है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक लाभ उठाया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की। इस अवसर पर हेमा भंडारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गैरसैण केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि राज्य के शहीदों के सपनों और संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “देहरादून में बैठकर सरकारें पहाड़ की वास्तविक समस्याओं को नहीं समझ सकतीं। जब तक गैरसैण को स्थाई राजधानी नहीं बनाया जाएगा, तब तक पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की समस्या का समाधान संभव नहीं है।” जन अधिकार पार्टी ने इस दौरान अपनी तीन प्रमुख मांगें भी सरकार के सामने रखीं। पार्टी ने मांग की है कि गैरसैण को तत्काल उत्तराखंड की स्थाई राजधानी घोषित किया जाए, वहां नियमित रूप से विधानसभा सत्र आयोजित किए जाएं और सभी प्रमुख विभागों के मुख्यालय गैरसैण स्थानांतरित किए जाएं। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए गैरसैण में स्थायी सचिवालय स्थापित करने की भी मांग की गई। पार्टी का मानना है कि यदि गैरसैण को राजधानी बनाया जाता है तो इससे पहाड़ी क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे पलायन पर भी रोक लगेगी। जन अधिकार पार्टी – जनशक्ति ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर संघर्ष समिति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और जनता की आवाज को बुलंद करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। अंत में हेमा भंडारी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो पार्टी पूरे प्रदेश में जनजागरण अभियान चलाएगी और इस आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। धरना स्थल पर पार्टी नेताओं की मौजूदगी से आंदोलनकारियों में उत्साह देखा गया और गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।






