आईआईटी रुड़की ने ग्रामीण नवाचारों के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से सतत आजीविका को दी नई दिशा

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की, उत्तराखंड | 22 अप्रैल 2026: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने अपने ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह RuTAG के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सतत आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान ने नवाचारी ग्रामीण प्रौद्योगिकियों के सफल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने का कार्य किया है।
यह पहल भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) के कार्यालय के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण आवश्यकताओं और उन्नत तकनीकी समाधानों के बीच की दूरी को कम करना है। RuTAG 2.0 के अंतर्गत विकसित प्रौद्योगिकियों को उद्योगों तक पहुंचाकर उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
आईआईटी रुड़की द्वारा हस्तांतरित प्रमुख तकनीकों में मल्टी-मिलेट डिहस्किंग मशीन और हेम्प डिकॉर्टिकेटर मशीन शामिल हैं। मल्टी-मिलेट डिहस्किंग मशीन मिलेट्स के प्रसंस्करण को तेज, कुशल और कम श्रमसाध्य बनाती है। इससे प्रसंस्करण समय में कमी, दानों की क्षति में गिरावट और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। वहीं हेम्प डिकॉर्टिकेटर मशीन हेम्प फाइबर और वुडी कोर को अलग करने की प्रक्रिया को सरल बनाती है, जिससे वस्त्र, निर्माण और कंपोजिट उद्योगों में इसके उपयोग की संभावनाएं बढ़ती हैं।
इन तकनीकों के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए इंडो क्लाइमेट लैब प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली), जय मां दुर्गा इंजीनियरिंग कंपनी (रुड़की) और धीमन एंटरप्राइजेज (रुड़की) जैसे उद्योग साझेदारों के साथ समझौते किए गए हैं। इस मौके पर संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी और RuTAG टीम के प्रमुख सदस्य भी उपस्थित रहे।
इस पहल पर बोलते हुए आईआईटी रुड़की के अधिष्ठाता (SRIC) प्रो. विवेक कुमार मलिक ने कहा कि यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण संस्थान की उस सोच को दर्शाता है जिसमें शोध को वास्तविक जीवन में उपयोगी परिणामों में बदला जाता है। उन्होंने कहा कि उद्योगों के साथ साझेदारी के माध्यम से इन तकनीकों का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
RuTAG के प्रधान अन्वेषक प्रो. सुनील कुमार सिंगल ने कहा कि इन तकनीकों को विशेष रूप से ग्रामीण जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इनके उद्योगों को हस्तांतरण से किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय में वृद्धि होगी और कार्य दक्षता में सुधार आएगा।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि संस्थान तकनीकी नवाचारों को समाज के लिए उपयोगी उत्पादों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि RuTAG जैसी पहलें शैक्षणिक अनुसंधान और जमीनी जरूरतों के बीच मजबूत सेतु का कार्य करती हैं।
इस पहल को विभिन्न संगठनों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, जो इसके व्यापक उपयोग और वाणिज्यिक संभावनाओं को दर्शाता है। आईआईटी रुड़की का यह प्रयास न केवल ग्रामीण विकास को गति देगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा।






