हड़ताल के बीच पास हो रहे नक्शे,रुड़की हरिद्वार विकास प्राधिकरण में जेई लॉगिन पर उठे गंभीर सवाल, लोगों को निर्माण में हो रही परेशानी

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
रुड़की। रुड़की-हरिद्वार विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) में जूनियर इंजीनियर (जेई) के आधिकारिक लॉगिन के दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि जेई का लॉगिन किसी अन्य व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिससे आवासीय और व्यावसायिक मानचित्रों की स्वीकृति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इस कथित अनियमितता के चलते कई फाइलें लंबित पड़ी हैं और आम लोगों को अपने निर्माण कार्य शुरू करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।सूत्रों के मुताबिक, फाइलों को आगे बढ़ाने और पास कराने के नाम पर मोटी रकम की मांग की जा रही है। आरोप यह भी है कि जिन आवेदकों द्वारा कथित रूप से लेनदेन नहीं किया जा रहा, उनकी फाइलों को जानबूझकर रोका जा रहा है। इससे न केवल विभाग की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि आम जनता का भरोसा भी कमजोर होता नजर आ रहा है। नियमों के अनुसार, जेई का लॉगिन केवल संबंधित अधिकारी के पास ही होना चाहिए और वही इसे संचालित करता है, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
स्थिति को और संदिग्ध तब माना जा रहा है जब जिले में इंजीनियर्स की हड़ताल जारी है। हड़ताल के बावजूद करीब 70 मानचित्रों की स्वीकृति होना कई सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब जेई कार्य से दूर हैं, तो उनके लॉगिन के माध्यम से फाइलों को कौन आगे बढ़ा रहा है। इससे यह आशंका और मजबूत हो जाती है कि सिस्टम का संचालन किसी और के हाथों में है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 फरवरी से 20 मार्च तक लगभग 500 मानचित्रों को स्वीकृति दी गई थी। वहीं 20 मार्च से शुरू हुई हड़ताल के बाद अब तक करीब 70 आवासीय मानचित्रों को मंजूरी दी जा चुकी है। यह अंतर विभागीय प्रक्रियाओं में असामान्यता की ओर इशारा करता है और यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है।
इस पूरे मामले पर एचआरडीए सचिव मनीष कुमार का कहना है कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला अभी तक नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है या जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं और पहले भी इस तरह के आरोप सामने आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि पूर्व में भी एक कर्मचारी पर दूसरे के लॉगिन का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था, जिसके बाद उसका तबादला कर दिया गया था।
अब एक बार फिर इस तरह के आरोप सामने आने से विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। आम लोगों का कहना है कि यदि समय पर मानचित्र स्वीकृत नहीं होंगे, तो उनके निर्माण कार्य प्रभावित होंगे, जिससे आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह न केवल विभाग की साख को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि आम जनता की परेशानियां भी बढ़ती चली जाएंगी।






