भाजपा के भीतर से भी उठी अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI जांच की मांग, बढ़ा सरकार पर दबाव

(व्योरो रिपोर्ट – दिलशाद खान।KNEWS18)
(रुड़की/देहरादून)। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग अब केवल विपक्षी दलों या आम जनता तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब भारतीय जनता पार्टी के भीतर से भी इस संवेदनशील और बहुचर्चित प्रकरण में आवाज उठने लगी है। भाजपा के युवा नेता एवं फोनिक्स यूनिवर्सिटी के चेयरमैन चैरब जैन ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच कराए जाने को लेकर सरकार को व्यक्तिगत सुझाव दिया है, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है।चैरब जैन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वह उत्तराखंड की जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं और प्रदेश में न्याय एवं कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के पक्षधर हैं। उन्होंने लिखा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है और जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके और दोषियों को सख्त सजा मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह सुझाव किसी प्रकार के राजनीतिक दबाव, विरोध या दलगत राजनीति से प्रेरित नहीं है। यह सुझाव उन्होंने केवल और केवल जनभावनाओं को समझते हुए और प्रदेश में विश्वास का माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से दिया है। चैरब जैन का कहना है कि जब तक जनता का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं होता, तब तक इस मामले में उठ रहे सवाल खत्म नहीं होंगे। गौरतलब है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए पूरे उत्तराखंड में लगातार आंदोलन तेज होते जा रहे हैं। राजधानी देहरादून से लेकर पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों तक जगह-जगह धरना-प्रदर्शन, कैंडल मार्च, पुतला दहन और जनसभाएं आयोजित की जा रही हैं। महिलाएं, युवा, सामाजिक संगठन और आम नागरिक बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा लगातार चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब सत्तारूढ़ दल के भीतर से भी इस प्रकार की मांग उठने लगे, तो यह संकेत है कि मामला केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह एक गंभीर नैतिक और राजनीतिक चुनौती बन चुका है। भाजपा के भीतर से आवाज उठना इस बात को दर्शाता है कि जनदबाव लगातार बढ़ रहा है और सरकार के सामने अब इस प्रकरण को लेकर बड़े और निर्णायक कदम उठाने की चुनौती है।बताया जा रहा है कि चैरब जैन लगातार धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। वे विभिन्न सामाजिक कार्यों के माध्यम से युवाओं के बीच अपनी पहचान बना रहे हैं और एक युवा नेता के रूप में उभरते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। जनता यह जानना चाहती है कि सरकार बढ़ते जनआक्रोश और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड में क्या फैसला लेती है और क्या सच में इस मामले की सीबीआई जांच का रास्ता साफ होता है या नहीं।

