HRDA में ‘मास्टर माइंड’ का खेल? आवासीय नक्शे पर अस्पताल का धंधा!
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
हरिद्वार। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) की कार्यशैली को लेकर अशोक वाटिका, सलेमपुर महदूद का एक मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि आवासीय भवन के मानचित्र पर अस्पताल जैसी व्यावसायिक गतिविधि संचालित की जा रही है। मामला सामने आने के बाद अब सवाल केवल भवन के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी उठ रहा है कि आखिर प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं हुई।
स्थानीय स्तर पर इस प्रकरण में कथित ‘मास्टर माइंड’ की भूमिका की जांच की मांग भी उठ रही है। हालांकि किसी व्यक्ति की संलिप्तता अथवा कथित आर्थिक लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
मानचित्र की फाइल खोले तो सामने आएगा सच
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सबसे पहले भवन की स्वीकृत मानचित्र फाइल की जांच जरूरी बताई जा रही है। इसमें यह देखा जाना चाहिए कि मानचित्र किस उद्देश्य से स्वीकृत हुआ, आवेदन किसने किया, दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई, तकनीकी परीक्षण किसने किया और मौके का निरीक्षण कब-कब किया गया।
इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि भवन का वास्तविक उपयोग कब बदला और प्राधिकरण को इसकी जानकारी कब मिली। यदि आवासीय मानचित्र पर व्यावसायिक या चिकित्सीय गतिविधि संचालित हो रही थी, तो निगरानी तंत्र की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
छोटे निर्माण पर सख्ती, बड़े मामले पर सवाल क्यों?
HRDA पर उठ रहा सबसे बड़ा सवाल यही है कि छोटे मकानों और निर्माण कार्यों में नियमों की जांच के लिए अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, लेकिन यदि किसी बड़े भवन में अस्पताल जैसी गतिविधि लंबे समय से संचालित होने का आरोप है तो यह प्राधिकरण की नजर से कैसे बची रही?
क्या यह केवल निगरानी में चूक थी या किसी स्तर पर लापरवाही हुई? इन सवालों का जवाब जांच के माध्यम से सामने आना जरूरी है।
कथित लेन-देन की चर्चा भी जांच के घेरे में
इस प्रकरण को लेकर क्षेत्र में कथित लेन-देन की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार के आर्थिक लेन-देन, प्रभाव या सिफारिश से जुड़े ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो जांच केवल भवन संचालक तक सीमित न रखकर संबंधित सभी स्तरों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
‘मास्टर माइंड’ कौन? जांच से ही सामने आएगा सच
यदि वास्तव में किसी व्यक्ति ने नियमों को दरकिनार कराने, फाइल आगे बढ़वाने या निगरानी व्यवस्था को प्रभावित करने में भूमिका निभाई है तो उसकी पहचान जांच के माध्यम से होनी चाहिए। इसके लिए मानचित्र फाइल, निरीक्षण रिपोर्ट, पत्राचार, स्वीकृति प्रक्रिया और भवन के वास्तविक उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
अब सवाल HRDA की जवाबदेही का भी है। यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो अस्पताल जैसी गतिविधि पर भी वही नियम लागू होने चाहिए जो किसी सामान्य आवासीय निर्माण पर लागू होते हैं।
अशोक वाटिका का यह मामला अब HRDA की कार्यप्रणाली की परीक्षा बन गया है। जरूरत है कि प्राधिकरण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, जिम्मेदारी तय करे और यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई करे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—जब छोटी-सी निर्माण गतिविधि भी प्राधिकरण की नजर में आ जाती है, तो आवासीय भवन में अस्पताल संचालन का मामला आखिर इतने समय तक कैसे चलता रहा? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
