विधानसभा गेट पर पलटी गन्ने की ट्रॉली, सड़क पर लगा गन्ने का ढेर किसानों के बकाया भुगतान को लेकर कांग्रेस विधायक का विरोध

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
राज्य विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान उस समय अचानक हंगामे की स्थिति बन गई, जब झबरेड़ा से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति किसानों के साथ ट्रैक्टर-ट्राली में गन्ना लेकर विधानसभा परिसर पहुंच गए। विधायक और किसानों ने विधानसभा गेट के बाहर ही गन्ने से भरी ट्राली को पलट दिया, जिससे सड़क पर गन्ने का ढेर लग गया और कुछ देर के लिए यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन ने मौके पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। गन्ना सड़क पर फैलने से विधानसभा गेट के बाहर लंबा जाम लग गया और वहां मौजूद लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान किसानों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गन्ना 1 का करोड़ों रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित पड़ा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है।
विधायक वीरेंद्र जाति ने किसानों के समर्थन में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और बार-बार आश्वासन देने के बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत की और सड़क पर फैले गन्ने को हटाने का काम शुरू कराया। कुछ ही देर में गन्ने को सड़क से किनारे किया गया, जिसके बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए, क्योंकि ट्रैक्टर-ट्राली के साथ विधानसभा गेट तक पहुंचना एक बड़ी चूक माना जा रहा है।
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की सलाह दी। वहीं पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए किसी भी अप्रिय घटना को टालने में सफलता हासिल की।
इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर गन्ना किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से सामने ला दिया है। प्रदेश में गन्ना भुगतान का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान न मिलने से उन्हें कर्ज और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसानों और विपक्ष की ओर से दी गई चेतावनी से साफ है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।






