आईआईटी रुड़की में “विजन 2047: समृद्ध एवं महान भारत 2.0” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की, उत्तराखंड | 24 अप्रैल 2026 — Indian Institute of Technology Roorkee में “विजन 2047: समृद्ध एवं महान भारत 2.0” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने देश के विकासात्मक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वदेशी शोध संस्थान के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लेकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के रोडमैप पर गंभीर मंथन किया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में Kavinder Gupta (राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश) की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ मंच पर K. K. Pant, U. P. Singh, N. P. Padhy, Somnath Sachdeva, Ajit Chaturvedi और Surekha Dangwal जैसे गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान, कुलगीत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिससे आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा भी मिली। अपने स्वागत भाषण में प्रो. के. के. पंत ने वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए शिक्षा, उद्योग और शासन के समन्वय पर बल दिया। उन्होंने अनुसंधान को उद्योग से जोड़ने और नवाचार-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने सम्मेलन की थीम पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय विकास और नीतिगत सुधारों की दिशा स्पष्ट की। इस दौरान 61 करोड़ रोजगार सृजन के लक्ष्य के साथ एक व्यापक राष्ट्रीय रोजगार नीति का भी प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसे सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण माना गया। सम्मेलन में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री Jitendra Singh और स्वास्थ्य मंत्री J. P. Nadda ने वर्चुअल माध्यम से अपने विचार साझा किए। इसके अलावा उद्योग और मीडिया क्षेत्र से जुड़े वक्ताओं ने भी राष्ट्र निर्माण में शिक्षा और नवाचार की भूमिका को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि काविंदर गुप्ता ने अपने संबोधन में भारत की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए समेकित नीतियों और समावेशी विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन इस लक्ष्य की प्राप्ति में अहम भूमिका निभाएंगे। सम्मेलन में 100 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की भागीदारी रही, जहां समावेशी आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति, सतत विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही “सेंटर फॉर प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग” का उद्घाटन भी किया गया, जो भारी उद्योग मंत्रालय और विभिन्न औद्योगिक साझेदारों के सहयोग से स्थापित एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने आईआईटी रुड़की की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) प्रयोगशाला का निरीक्षण किया और दिव्यांगजनों के लिए विकसित विशेष गतिशीलता वाहन का अवलोकन किया। यह पहल समावेशी तकनीक और सामाजिक सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी। सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित प्रदर्शनी सत्र में कई स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत का भविष्य नवाचार और उद्यमिता पर आधारित होगा। कुल मिलाकर, यह सम्मेलन “विजन 2047” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक मजबूत और सकारात्मक पहल साबित हुआ।

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