आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट ने दिखाई राह: नेट ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने में पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर बनेगा गेमचेंजर

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)

रुड़की / नई दिल्ली, 13 अप्रैल 2026 — भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने “भारत में पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर (PSP) विकास के लिए आगे की राह” विषय पर एक व्यापक राष्ट्रीय रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट देश को दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने और वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने में मार्गदर्शन प्रदान करती है।
रिपोर्ट का औपचारिक विमोचन नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के प्रभावी एकीकरण के लिए इस तरह की तकनीकों की भूमिका निर्णायक होगी।
प्रो. अरुण कुमार के नेतृत्व में तैयार इस अध्ययन में पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विस्तार से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों और संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि नीतिगत जटिलताएं, स्वीकृति प्रक्रियाओं में देरी, वित्तीय सीमाएं, भूमि उपलब्धता और भू-वैज्ञानिक कठिनाइयां इस क्षेत्र के विकास में प्रमुख बाधाएं हैं। साथ ही निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी भी एक अहम चुनौती के रूप में सामने आई है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए रिपोर्ट में कई ठोस सुझाव दिए गए हैं, जिनमें स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल बनाना, नवोन्मेषी वित्तीय मॉडल विकसित करना, जोखिम साझा करने की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करना और विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना शामिल है। इन उपायों से पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के तेज और प्रभावी क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
रिपोर्ट की एक विशेषता अगली पीढ़ी के पम्प्ड स्टोरेज मॉडल्स पर ध्यान केंद्रित करना है। इसमें भारत के पश्चिमी तट पर समुद्र आधारित प्रणालियों के विकास और परित्यक्त खदानों को ऊर्जा भंडारण के लिए उपयोग में लाने जैसे नवाचार शामिल हैं। ये मॉडल भूमि उपयोग को अनुकूल बनाने, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलापन बढ़ाने में सहायक साबित हो सकते हैं।
कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की ने कहा कि यह अध्ययन विज्ञान आधारित समाधान विकसित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने पम्प्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर को विश्वसनीय, विस्तार योग्य और सतत ऊर्जा प्रणालियों का आधार बताया, जो न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में भी योगदान देगा।
वहीं केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में पीएसपी की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बढ़ती ऊर्जा मांगों को सतत रूप से पूरा करने के लिए मजबूत नीतिगत समर्थन और तेज क्रियान्वयन आवश्यक है।
इस कार्यक्रम में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें मयंक तिवारी, आकाश त्रिपाठी और मिन्हास आलम प्रमुख रहे। इसके अलावा सरकारी और निजी डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी ने इस क्षेत्र में बढ़ते राष्ट्रीय फोकस को स्पष्ट किया।
यह अध्ययन न केवल तकनीकी और नीतिगत दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका सामाजिक प्रभाव भी व्यापक है। विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, आर्थिक विकास और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। साथ ही यह भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ और जलवायु-सहिष्णु ऊर्जा प्रणालियों में अग्रणी भूमिका निभाने में भी मदद करेगा।
इस रिपोर्ट के माध्यम से आईआईटी रुड़की ने एक बार फिर साबित किया है कि वह देश के ऊर्जा भविष्य को दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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