हरिद्वार की “लेडी सिंघम” अनिता भारती पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, सस्पेंशन और संपत्ति जांच की मांग

(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS18)
हरिद्वार में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती, जिन्हें आमतौर पर “लेडी सिंघम” के नाम से जाना जाता है, इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गई हैं। उन पर भ्रष्टाचार, अवैध धन उगाही और लाइसेंस प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है, वहीं व्यापारिक समुदाय में भी रोष देखा जा रहा है।
प्राइड फार्मा कंपनी के प्रतिनिधियों ने प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान इन आरोपों को सार्वजनिक किया। कंपनी प्रतिनिधि रमेश मैठाणी और युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैश खुराना ने संयुक्त रूप से बताया कि उन्होंने दवा निर्माण लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बाद उन्हें शिवालिक नगर स्थित ड्रग विभाग कार्यालय में बुलाया गया, जहां उनके दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।
आरोप है कि इसके बाद एक व्हाट्सएप नंबर के माध्यम से उनसे 15 हजार रुपये की मांग की गई। प्रतिनिधियों के अनुसार, उन्होंने दबाव में आकर 10 हजार रुपये एक बैंक खाते में जमा भी कराए, जबकि शेष राशि की मांग लगातार जारी रही। उन्होंने यह भी दावा किया कि लाइसेंस प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग बहानों से कई बार पैसे लिए गए और कुल मिलाकर लाखों रुपये की वसूली की गई।
कंपनी प्रतिनिधियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और उन पर मानसिक दबाव बनाकर पैसे वसूले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पैसे देने में देरी की जाती थी, तो लाइसेंस प्रक्रिया को जानबूझकर रोका जाता था या नई-नई आपत्तियां लगाई जाती थीं।
प्रेस वार्ता के दौरान प्रतिनिधियों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। साथ ही ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उनकी आय से अधिक संपत्ति की जांच कराने की भी अपील की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई, तो यह भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।
इस मामले में एक और अहम पहलू व्हाट्सएप चैट का वायरल होना है, जिसे कथित तौर पर रिश्वत मांगने के सबूत के रूप में पेश किया जा रहा है। हालांकि, इन चैट्स की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इनके सामने आने से मामला और भी गंभीर हो गया है।
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण में ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती का कहना है उन पर लगे सभी आरोप बेबुनियाद और झूठे है ।लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील बनी हुई है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों की नजरें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।हरिद्वार/भगवानपुर। हरिद्वार में तैनात ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती, जिन्हें आमतौर पर “लेडी सिंघम” के नाम से जाना जाता है, इन दिनों गंभीर आरोपों और विवादों के केंद्र में हैं। उन पर भ्रष्टाचार, अवैध धन उगाही, लाइसेंस प्रक्रिया में अनियमितताओं तथा कथित नकली दवाइयों के कारोबार को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है, वहीं व्यापारिक समुदाय और स्थानीय लोगों में भी रोष देखा जा रहा है।
प्राइड फार्मा कंपनी के प्रतिनिधियों ने प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान यह मामला सार्वजनिक किया। कंपनी प्रतिनिधि रमेश मैठाणी और युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैश खुराना ने संयुक्त रूप से बताया कि उन्होंने दवा निर्माण लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आरोप है कि आवेदन के बाद उन्हें शिवालिक नगर स्थित ड्रग विभाग कार्यालय में बुलाया गया, जहां उनके दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद कथित तौर पर एक व्हाट्सएप नंबर के माध्यम से उनसे 15 हजार रुपये की मांग की गई।
प्रतिनिधियों के अनुसार, दबाव में आकर उन्होंने 10 हजार रुपये एक बैंक खाते में जमा भी कराए, जबकि शेष राशि की मांग लगातार जारी रही। उनका आरोप है कि लाइसेंस प्रक्रिया के दौरान अलग-अलग बहानों से कई बार पैसे लिए गए और कुल मिलाकर लाखों रुपये की वसूली की गई। उन्होंने कहा कि यदि भुगतान में देरी होती थी, तो लाइसेंस प्रक्रिया को जानबूझकर रोका जाता था और नई-नई आपत्तियां लगाकर मानसिक दबाव बनाया जाता था।
मामले में एक और गंभीर आरोप भगवानपुर क्षेत्र की दवा फैक्ट्रियों को लेकर लगाया गया है। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि यहां कई बड़ी फैक्ट्रियों में संदिग्ध और कथित नकली दवाइयों का निर्माण किया जा रहा है, जिन्हें कथित तौर पर विभागीय “सेटिंग” के जरिए संरक्षण दिया जा रहा है। दावा किया गया कि किसी भी दवाई का सैंपल देने पर एक महीने के भीतर बड़ी मात्रा में वही दवाइयां तैयार कर उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि इन बड़ी फैक्ट्रियों पर ड्रग विभाग की नजर अब तक क्यों नहीं पड़ी, या फिर इन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
आरोपकर्ताओं का कहना है कि इस प्रकार की दवाइयां लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं और इनके सेवन से साइड इफेक्ट, हार्ट अटैक तथा अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने इसे आम जनता की जान से खिलवाड़ बताया है।
आरोप लगाने वालों ने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले सोशल मीडिया पर बिना किसी नाम का उल्लेख किए एक पोस्ट डाली थी, जिसमें एक वरिष्ठ ड्रग इंस्पेक्टर पर रिश्वत मांगने का संकेत दिया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन कार्रवाई के बाद संबंधित अधिकारी स्वयं संदेह के घेरे में आ गईं।
प्रेस वार्ता में मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच, तत्काल निलंबन तथा आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की गई। हालांकि, ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार और झूठा बताया है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और जांच कब तक सच्चाई सामने ला पाती है।






