November 2, 2026

भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों से उत्तराखंड का पशुपालक तबाह: आशीष सैनी

(ब्योरो दिलशाद खान KNEWS 18)

हरिद्वार। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता आशीष सैनी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर पशुपालकों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए दूध का खरीद मूल्य तत्काल बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गाय और गौ-माता के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के पशुपालक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। पशुओं के चारे, दाने, चोकर, भूसे और देखभाल पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन दूध का उचित मूल्य नहीं मिलने से पशुपालन का व्यवसाय घाटे का सौदा बनता जा रहा है।

आशीष सैनी ने कहा कि उत्तराखंड में पशुपालकों को गाय के दूध के लिए लगभग 34 से 36 रुपये प्रति लीटर मिल रहे हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में गाय के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये और भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर बताए जाने से दोनों राज्यों की नीतियों में अंतर स्पष्ट होता है। उन्होंने मांग की कि उत्तराखंड सरकार भी हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर पशुपालकों के हित में ठोस निर्णय लेते हुए दूध का खरीद मूल्य 60 से 70 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर निर्धारित करे।

दूध पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पशुपालकों को राहत देने के लिए राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली दुग्ध प्रोत्साहन राशि को चार रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर छह से दस रुपये प्रति लीटर किया जाना चाहिए। इसका भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से पशुपालकों के बैंक खातों में किया जाए, ताकि उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।

उन्होंने कहा कि दुग्ध मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए फैट और एसएनएफ के मानकों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। इससे दूध की गुणवत्ता के अनुरूप उचित भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा और पशुपालकों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा।

घस्यारी कल्याण योजना पर उठाए सवाल

आशीष सैनी ने मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। पहाड़ों में महिलाओं को पशुओं के लिए घास जुटाने के लिए दुर्गम रास्तों और खतरनाक ढलानों पर जाना पड़ता है। इससे उनकी जान पर भी खतरा बना रहता है।

उन्होंने मांग की कि प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर चारा भंडारण केंद्र स्थापित किए जाएं। पैक्ड साइलेज पर 80 प्रतिशत और पशु आहार तथा भूसे पर 60 प्रतिशत सब्सिडी देने की व्यवस्था की जाए, ताकि पशुपालकों को सस्ती दरों पर चारा उपलब्ध हो सके।

वन्यजीवों से नुकसान पर मिले त्वरित मुआवजा

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बाघ, तेंदुए और जंगली सुअरों के कारण पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने मुआवजे की जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने और ग्राम प्रधान तथा राजस्व उपनिरीक्षक के सत्यापन के आधार पर 72 घंटे के भीतर दुधारू पशु की मृत्यु पर एक लाख रुपये का मुआवजा सीधे बैंक खाते में देने की मांग की। इसके साथ ही सीमांत पशुपालकों के लिए शत-प्रतिशत मुफ्त पशुधन बीमा लागू करने की बात कही।

उन्होंने प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों के सचिवों का प्रोत्साहन मानदेय भी 50 पैसे प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर दो रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग उठाई।

अन्य राज्यों की नीतियों का दिया हवाला

आशीष सैनी ने कर्नाटक, तमिलनाडु और गोवा की दुग्ध नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अन्य राज्यों में पशुपालकों को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। उत्तराखंड सरकार को भी इन मॉडलों का अध्ययन कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी नीति तैयार करनी चाहिए।

उन्होंने पशुधन गणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2012 से 2019 के बीच प्रदेश में गोवंश, भैंसों और भेड़ों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। उनके अनुसार, पशु चिकित्सालयों में चिकित्सकों और आवश्यक दवाओं की कमी तथा दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं की सीमित पहुंच भी पशुपालकों की समस्याएं बढ़ा रही है।

16 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई की चेतावनी

आशीष सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार को पशुपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़ी 16 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दूध का उचित खरीद मूल्य निर्धारित करने, चारा उपलब्ध कराने, पशुधन बीमा लागू करने और पशुपालकों को समय पर प्रोत्साहन राशि देने के लिए तत्काल नीतिगत निर्णय लेने की जरूरत है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने पशुपालकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया और दूध का खरीद मूल्य बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पशुपालकों के समर्थन में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी

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