राज्य आंदोलनकारियों में आक्रोश, 10 नवंबर से धरना और क्रमिक अनशन की चेतावनी
(ब्योरो दिलशाद खान KNEWS 18)
रुड़की, हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों और स्थानीय निवासियों की समस्याओं को लेकर अशोक नगर क्षेत्रीय विकास समिति तथा उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति ने सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की है। 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित संयुक्त बैठक में क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं, ढंडेरा रेलवे स्टेशन का नाम बदलने, रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण और चिन्हीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद समिति अध्यक्ष हर्ष प्रकाश काला ने प्रेस वार्ता कर मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
1987 से उठ रही स्टेशन का नाम बदलने की मांग
हर्ष प्रकाश काला ने कहा कि ढंडेरा रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रुड़की कैंट रेलवे स्टेशन करने की मांग वर्ष 1987 से उठाई जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड सरकार तक कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अभी तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि 14 मई 2012 को तत्कालीन जिलाधिकारी सचिन कुर्वे की मौजूदगी में रेलवे अधिकारियों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता हुई थी। इसके बाद नाम परिवर्तन के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बावजूद मांग अब तक लंबित है।
165 करोड़ के आरओबी का निर्माण नहीं होने से परेशानी
काला ने रेलवे फाटक संख्या 512 पर आरओबी निर्माण में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्षेत्रवासी वर्ष 1987 से इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। धरना-प्रदर्शन, क्रमिक अनशन, आमरण अनशन और रेल चक्का जाम जैसे आंदोलन भी किए गए। उनके अनुसार, रेलवे बोर्ड ने मार्च 2013 में आरओबी को मंजूरी दी थी, लेकिन लगभग 14 वर्ष बीतने के बावजूद निर्माण नहीं हो पाया है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित आरओबी की लागत करीब 165 करोड़ रुपये है। इसके निर्माण में देरी से हजारों गांवों के लाखों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। रेलवे फाटक बंद होने पर लंबा जाम लगता है और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि जाम के कारण समय पर उपचार नहीं मिलने से कुछ मरीजों की एंबुलेंस में ही मौत हो चुकी है।
समिति ने रेलवे फाटक संख्या 511बी पर अंडरपास या आरओबी निर्माण के लिए भी राज्य सरकार से प्रस्ताव तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजने की मांग की।
राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण का मुद्दा
समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जीवानंद बुडाकोटी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए आंदोलनकारियों ने अपना घर-परिवार छोड़कर संघर्ष किया। इसके बावजूद कई आंदोलनकारी अब तक चिन्हीकरण से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के कारण आंदोलनकारी लगातार दुनिया से विदा हो रहे हैं, इसलिए सरकार को इस मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए।
10 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी
बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि 9 नवंबर 2026 से पहले चिन्हीकरण से वंचित सक्रिय राज्य आंदोलनकारियों को चिन्हित नहीं किया गया, तो 10 नवंबर से जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना और क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। साथ ही ढंडेरा स्टेशन का नाम बदलकर रुड़की कैंट करने, पूर्वी केबिन पर अंडरपास के लिए प्रस्ताव भेजने और पश्चिमी केबिन के फाटक संख्या 512सी पर स्वीकृत आरओबी का निर्माण दो माह के भीतर कराने की मांग रखी गई।
हर्ष प्रकाश काला के अनुसार, 10 अक्टूबर को प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन जिलाधिकारी हरिद्वार, संयुक्त मजिस्ट्रेट रुड़की और तहसीलदार रुड़की के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था। अधिकारियों ने एक सप्ताह में सेना, रेलवे प्रशासन और राज्य सरकार के बीच वार्ता कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया था। मांगें पूरी नहीं होने पर वर्ष 1992 की तर्ज पर रेल रोको आंदोलन और चक्का जाम करने की चेतावनी दी गई।
बैठक में क्षेत्रीय जनता ने “काम नहीं तो वोट नहीं” का नारा देते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान जीवानंद बुडाकोटी, देव सिंह सांवत, हुक्म सिंह बिष्ट, दिगंबर सिंह नेगी, एचडी देवरानी, मोहन सांवत, शिव सिंह रावत, कृपाल सिंह, सच्चिदानंद ध्यानी, राजू कंडियाल, प्रदीप बुडाकोटी, सरोज थपलियाल, सरोज बड़थ्वाल, इंद्रपाल सिंह गुसाईं, प्रदीप रावत, दिनेश प्रकाश नेगी, बसंती नेगी, जगदेश्वरी रावत, शिव चरण बिंजौला, कांति देवी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।


