लो-फ्रीक्वेंसी के चलते आकस्मिक रोस्टिंग, एक-दो दिन में सुधरेंगे हालात: अधीक्षण अभियंता विनोद पांडेय
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की। पिछले दो-तीन दिनों से देहात और शहरी क्षेत्रों में बिजली की रोस्टिंग से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता विनोद पांडेय ने बताया कि ग्रिड में लो-फ्रीक्वेंसी की स्थिति बनने के कारण आकस्मिक रोस्टिंग करनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अधिकतम एक-दो दिन और रह सकती है, जिसके बाद बिजली आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। उन्होंने उपभोक्ताओं से धैर्य बनाए रखने और विभाग का सहयोग करने की अपील की है।
ग्रिड को बचाने के लिए जरूरी हुई रोस्टिंग
अधीक्षण अभियंता विनोद पांडेय ने बताया कि जब बिजली की मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ जाता है तो ग्रिड की फ्रीक्वेंसी कम होने लगती है। ऐसी स्थिति में यदि मांग को नियंत्रित नहीं किया गया तो ग्रिड फेल होने का खतरा पैदा हो सकता है। ग्रिड फेल होने की स्थिति में व्यापक स्तर पर बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी को देखते हुए ग्रिड को स्थिर रखने के लिए रोस्टिंग का सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि रोस्टिंग का सीधा असर उपभोक्ताओं को बिजली कटौती के रूप में दिखाई देता है, लेकिन इसका उद्देश्य बिजली व्यवस्था को बड़े नुकसान से बचाना है। ग्रिड स्थिर रहने से उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, शहरों, गांवों और घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति बनाए रखना संभव होता है।
अनुमान से अधिक बढ़ी बिजली की मांग
विनोद पांडेय के अनुसार विभाग सामान्य तौर पर बिजली की मांग का पूर्वानुमान तैयार करता है। उसी के आधार पर बिजली की उपलब्धता और आपूर्ति की योजना बनाई जाती है। लेकिन कई बार वास्तविक मांग अनुमान से काफी अधिक हो जाती है। अचानक मौसम गर्म होने या लोगों द्वारा एसी, कूलर समेत अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक इस्तेमाल करने से बिजली की मांग तेजी से बढ़ सकती है।
मांग बढ़ने और उपलब्ध आपूर्ति में अंतर आने पर ग्रिड की फ्रीक्वेंसी प्रभावित होती है। ऐसे में रोस्टरिंग के माध्यम से मांग को नियंत्रित करना जरूरी हो जाता है।
बिजली चोरी भी बढ़ी मांग का कारण
अधीक्षण अभियंता ने बिजली चोरी को भी व्यवस्था पर पड़ने वाले दबाव का एक महत्वपूर्ण कारण बताया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी उपभोक्ता का स्वीकृत लोड दो किलोवाट है और वह अनधिकृत रूप से पांच किलोवाट तक बिजली का उपयोग करता है, तो इससे वास्तविक मांग बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से पिछले तीन दिनों से लगातार बिजली चोरी और अनधिकृत विद्युत उपयोग के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि यदि उनके क्षेत्र में कोई व्यक्ति बिजली चोरी करता पाया जाता है तो इसकी सूचना विभाग को दी जाए, ताकि बिजली व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव को कम किया जा सके।
जल विद्युत उत्पादन पर भी निर्भरता
विनोद पांडेय ने बताया कि उत्तराखंड में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा जल विद्युत परियोजनाओं पर निर्भर है। जल की उपलब्धता, मौसम और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण कई बार बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा ग्रिड से मिलने वाली बिजली में भी कभी-कभी कमी आने की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में सौर ऊर्जा समेत अन्य ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। वर्तमान स्थिति में मुख्य समस्या बिजली उत्पादन क्षमता की कमी से अधिक मांग का अनुमान से ज्यादा बढ़ जाना है।
उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील
अधीक्षण अभियंता विनोद पांडेय ने कहा कि विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिजली का अनावश्यक इस्तेमाल न करें और विशेष रूप से पीक डिमांड के समय गैर-जरूरी विद्युत उपकरणों का उपयोग सीमित रखें।
उन्होंने कहा कि लो-फ्रीक्वेंसी की स्थिति में ग्रिड को स्थिर रखना विभाग की प्राथमिकता है। मांग और आपूर्ति का संतुलन सामान्य होते ही रोस्टरिंग की स्थिति भी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने उपभोक्ताओं से धैर्य रखने, बिजली की बचत करने और विभाग का सहयोग करने की अपील की, ताकि बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा जा सके।
