जाति जनगणना में वैज्ञानिक व्यवस्था की मांग,जिलाध्यक्ष चौ. मुबशशीर एडवोकेट ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
(ब्योरो दिलशाद खान।KNEWS 18)
रुड़की। आगामी जाति जनगणना को लेकर कांग्रेस ओबीसी विभाग की ओर से वैज्ञानिक एवं प्रमाणिक व्यवस्था लागू किए जाने की मांग उठाई गई है। कांग्रेस ओबीसी विभाग के रुड़की जिला अध्यक्ष चौधरी मौ. मुबशशीर एडवोकेट ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर जातियों की सही और एकरूप गणना सुनिश्चित करने की मांग की। इस दौरान कांग्रेस ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. गौरव चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कांग्रेस ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. गौरव चौधरी ने कहा कि जाति जनगणना में प्रत्येक जाति और समुदाय की सही एवं प्रमाणिक गणना जरूरी है। सरकार को यूनिक कास्ट कोड, मानकीकृत जाति सूची और ओबीसी की स्पष्ट श्रेणी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि आंकड़ों में किसी प्रकार की विसंगति न रहे।
ज्ञापन में कहा गया कि आगामी जाति जनगणना सामाजिक और आर्थिक नीतियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में जातियों के अलग-अलग नाम, पर्यायवाची नाम, क्षेत्रीय नाम और वर्तनी के अंतर के कारण एक ही जाति के आंकड़े अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज न हों, इसके लिए पहले से वैज्ञानिक और मानकीकृत व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।
यूनिक कास्ट कोड बनाने की मांग
जिलाध्यक्ष चौ. मुबशशीर एडवोकेट ने मांग की कि प्रत्येक मान्यता प्राप्त जाति और समुदाय के लिए एक विशिष्ट वैज्ञानिक कास्ट कोड निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही एक ही जाति के प्रमाणित पर्यायवाची, क्षेत्रीय और वैकल्पिक नामों को उसी कोड से जोड़ा जाए। इससे जनगणना के दौरान आंकड़ों में दोहराव और विभाजन की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि नागरिक द्वारा बताए गए मूल जाति नाम को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखते हुए उसका वैज्ञानिक मानकीकरण किया जाना चाहिए। इससे लोगों की पहचान के साथ-साथ जनगणना के आंकड़ों की शुद्धता भी बनी रह सकेगी।
ओबीसी के लिए स्पष्ट श्रेणी की मांग
ज्ञापन में जनगणना प्रक्रिया में Other Backward Classes (OBC) की स्पष्ट और अलग श्रेणी का प्रावधान करने की मांग की गई। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों की आधिकारिक सूचियों तथा प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर राज्यवार Caste Master List तैयार करने का सुझाव दिया गया।
ज्ञापन में कहा गया कि किसी भी दो नामों को केवल समानता के आधार पर एक जाति न माना जाए, बल्कि आधिकारिक रिकॉर्ड, ऐतिहासिक दस्तावेज और विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद ही उनका एकीकरण किया जाए।
डिजिटल व्यवस्था लागू करने का सुझाव
जाति जनगणना की डिजिटल प्रक्रिया में गणनाकर्ताओं के लिए searchable Drop-down Menu/Assisted Selection System उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। इससे प्रमाणित जाति नामों और उनकी वर्तनी को आसानी से खोजने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा समाजशास्त्र, सामाजिक मानवशास्त्र, जनसांख्यिकी, सांख्यिकी, डेटा प्रबंधन और सामाजिक न्याय से जुड़े विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया गया।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे मौजूद
कार्यक्रम में कांग्रेस ओबीसी विभाग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आशीष सैनी, प्रदेश कोऑर्डिनेटर डॉ. रणबीर नगर, शाहिद हसन, कमर मामून, फहीम साबरी, राव रिफाकात, दानियाल मिर्जा, सरफराज मिर्जा, सलीम अहमद, रऊफ अहमद, फारूक अहमद, इरफान, इमरान, शमशाद, शिवम पवार, सुशील कश्यप, जाकिर, अंकित कुमार, राजा, आकाश राठी, पूजा, हेमंत, यश पवार, अनिकेत, सोनू, सलमान, अंकित, मोहसिन गौर, एहसान अली, मनीष चौधरी, गोल्डी चौधरी, मनोज कुमार, शाहरुख अली, छोटन सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने जाति जनगणना में आंकड़ों की शुद्धता और एकरूपता बनाए रखने पर जोर दिया। चौ. मौ. मुबशशीर एडवोकेट ने कहा कि जाति जनगणना की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे प्राप्त आंकड़े स्पष्ट, प्रमाणिक और भविष्य की योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण में उपयोगी साबित हों।

